❍ 21 / 03 / 18 की मुरली से चार्ट ❍ ⇛ TOTAL MARKS:- 100 ⇚



∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

➢➢ *स्वदर्शन चक्र फिराते रहे ?*

➢➢ *ज्ञान का मंथन कर अपने आपसे बातें की ?*

➢➢ *किसी से किनारा करने की बजाये सर्व का सहारा बनकर रहे ?*

➢➢ *कर्मभोग का वर्णन करने की बजाये कर्मयोग की स्थिति का वर्णन किया ?*
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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न* 
         ❂ *तपस्वी जीवन
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✧  *मास्टर नॉलेजफुलमास्टर सर्वशक्तिवान की स्टेज पर स्थित रह भिन्न-भिन्न प्रकार की क्यू से निकलबाप के साथ सदा मिलन मनाने की लगन में अपने समय को लगाओ और लवलीन स्थिति में रहो तो और सब बातें सहज समाप्त हो जायेंगी,* फिर आपके सामने आपकी प्रजा और भक्तों की क्यू लगेगी ।

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

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 *अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए* 
             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान* 
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   *"मैं बाप की छत्रछाया के अन्दर रहने वाली आत्मा हूँ"*

✧  सदा अपने को बाप की छत्रछाया के अन्दर रहने वाले अनुभव करते हो? *बाप की याद ही 'छत्रछाया' है। जो छत्रछाया के अन्दर रहते वह सदा सेफ रहते हैं। कभी बरसात या तूफान आता तो छत्रछाया के अन्दर चले जाते हैं। ऐसे बाप की याद 'छत्रछाया' है। छत्रछाया में रहने वाले सहज ही मायाजीत हैं।*

✧  *याद को भूला अर्थात् छत्रछाया से बाहर निकला। बाप की याद सदा साथ रहे। जो ऐसे छत्रछाया में रहने वाले हैं उन्हें बाप का सहयोग सदा मिलता रहता है।*

  हर शक्ति की प्राप्ति का सहयोग सदा मिलता रहता है। कभी कमजोर होकर माया से हार नहीं खा सकते। कभी माया याद भुला तो नहीं देती है?*63 जन्म भूलते रहे, संगमयुग है याद में रहने का युग। इस समय भूलना नहीं। भूलने से ठोकर खाई, दु:ख मिला। अभी फिर कैसे भूलेंगे! अभी सदा याद में रहने वाले।*

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं
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✧  *अन्त में सहज रीति शरीर के भान से मुक्त हो जायें - यह है 'पास विद आँनर की निशानी*। लेकिन वह तब हो सकेगी जब अपना चोला टाइट नही होगा। अगर टाइटनस होगी तो सहज मुक्त नहीं हो सकेंगे। टाइटनस का अर्थ है कोई से लगाव। इसलिए अब यही सिर्फ एक बात चेक करो - ऐसा लूज चोला हुआ है जो एक सेकण्ड में इस चोले को छोड़ सके।

✧  अगर कहाँ भी अटका हुआ होगा तो निकलने में भी अटक होगी। इसी को ही एवरडी कहा जाता है। *ऐसे एवरेडी वहीं होंगे जो हर बात में एवरडी होंगे*। प्रैक्टिकल में देखा ना - एक सेकण्ड में बुलावे पर ऐवरडी रह दिखाया। यह सोचा क्या कि बच्चे क्या कहेंगेबच्चों से बिगर मिले कैसे जावें - यह स़ोचा?

✧  एलान निकला और एवरेडी। चोले से इजी होने से चोला छोडना भी ईजी होता हैंइसलिए यह कोशिश हर वक्त करनी चाहिए। यही संगम युग का गायन होगा कि कैसे रहते हुए भी न्यारे थेतब ही एक सेकण्ड में न्यारे हो गये। *बहुत समय से न्यारे रहने वाले एक सेकण्ड में न्यारे हो जायेंगे*।

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा के इशारे* 
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〰✧  *आवाज से परे की स्थिति प्रिय लगती है वा आवाज़ में रहने की स्थिति प्रिय लगती हैकौन-सी स्थिति ज्यादा प्रिय लगती हैक्या दोनों ही स्थिति इकट्ठी रह सकती हैंइसका अनुभव हैयह अनुभव करते समय कौन सा गुण प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देता है? (न्यारा और प्यारा)* यह अवस्था ऐसी है जैसे बीज में सारा वृक्ष समाया हुआ होता हैवैसे ही इस अव्यक्त स्थिति में जो भी संगमयुग के विशेष गुणों की महिमा करते हो वह सर्व विशेष गुण उस समय अनुभव में आते हैं। क्योंकि मास्टर बीजरूप भी हैंनालेजफुल भी हैं। *तो सिर्फ शान्ति नहीं लेकिन शान्ति के साथ-साथ ज्ञान,अतीन्द्रिय सुखप्रेमआनन्दशक्ति आदि-आदि सर्व मुख्य गुणों का अनुभव होता है। न सिर्फ अपने को लेकिन अन्य आत्मायें भी ऐसी स्थिति में स्थित हुई आत्मा के चेहरे से इन सर्व गुणों का अनुभव करती हैं।*

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- बेहद ड्रामा के आदि-मध्य-अंत को समझना"*

 _ ➳  *सृष्टि रंगमंच पर चल रहे इस बेहद के ड्रामा में हीरो पार्ट धारी मैं आत्मा स्वयं के पार्ट को साक्षी होकर देख रही हूँ*... इस कल्याण कारी ड्रामा की हर सीन बेहद ही खूबसूरत है ... *सत्यं शिवं सुन्दरम् का गहरा एहसास करती हुई मैं आत्मा बुद्धि में स्वदर्शन चक्र फिराती हुई अपने फरिश्ता स्वरूप में स्थित हूँ बापदादा के सम्मुख*... और बापदादा आज *श्रीमत पर परफैक्ट बनने की विधि समझाते हुए विचार सागर मंथन के लिए समझानी दे रहे है*।

   *स्नेह शक्तियों और गुणों की मिठास खुद में समेटेमीठा- मीठा कहकर मुझे मीठा बनाने वाले मेरे मीठे बाबा बोले:-*"मेरी मास्टर ज्ञानसागर बच्ची, *जो पास्ट हुआ है वह फिर रिपीट हो रहा है यह बहुत समझने की बात है*क्या आप इस की गहराई समझ कर अपने इस संगम युगी जीवन के हीरो पार्ट के कर्तव्यों को भली भाँति समझती हो! *सतयुग के अपने यादगार जड चित्रों की महिमा का महत्व समझती हो*? *अपने फ्यूचर के फरिश्ता स्वरूप के फीचर का सबको साक्षात्कार कराती हो*?

 _ ➳  *इस पतित दुनिया में पावनता का बादल बन बरसतेबापदादा के रूहानी स्नेह में डूबकर दिव्य बुद्धि मैं आत्मापतित पावन बाप से बोली:-*"अपनी पावन ज्ञान गंगा से मेरी बुद्धि को निर्मल और दिव्य बनाने वाले मेरे मीठे बाबा! *स्वदर्शन चक्र की ये जो सौगात आपसे पायी हैइसने मुझ आत्मा की बुद्धि को दिव्य बुद्धि बनाया है। पग पग पर आपके साथ के अनुभवों की मीठी सी सौगात मेरी समझ को और भी गहरा बना रही है*...  *इस बेहद के ड्रामा के आदिमध्यअन्त की सारी नाॅलिज अब मेरी बुद्धि में समाँ रही है*...

  *विकारों की कैद में कराहती आत्माओ को लिबरेट करने वाले मेरे लिबरेटर शिव बाबा स्नेह से मुस्कुराते हुए बोले:-*" मेरी शिवशक्ति बच्ची,  बेहद के ड्रामा में मेरा परिचय सब आत्माओं को देने का दारोमदार तुम बच्ची पर है *गीता ज्ञान दाता मुझ शिव पिता को भूलकर कृष्ण को पूजती आत्माओं कोइस भ्रम से आप बच्ची लिबरेट कराओं... जाओ अब जाकर गीता  को करेक्ट कराओं*।अपने जड चित्रों के उपासको को अब अपने चैतन्य रूप की झलक दिखाओं। *परदर्शन में डूबी हर आत्मा को स्वदर्शन का अनुभव कराओं*।

 _ ➳  *परम पिता के असीम रूहानी स्नेह की गहरी अनुभूतियों में खोई मैं कल्प कल्प की विशेष आत्मा गुप्त रूहानी सेना के रूहानी कमांडर शिव पिता से बोली:-*"गुप्त वेश में आपकी शक्ति सेना ये कमाल कर रही है बाबा! गीता ज्ञान दाता प्रत्यक्ष हो रहा है, *आप समान बनकर साक्षात चैतन्य मूर्तियाँ एक नये कुरूक्षेत्र में उतर रही हैशिव पिता की प्रत्यक्षता आप स्वयं ही देख रहे है*श्वेतवस्त्रधारी ये दिव्यात्माए गीता के भगवान को प्रत्यक्ष कर रही है, *परदर्शन से मुक्त होकरदेखोकरोडो आत्माए -"यही है यही है" का अलख जगाती इधर ही आ रही है*।

  *दया के सागरप्रेम के सागरविषय सागर में डूबे बेडे को पार लगाने वाले हर्षित होमन्द मन्द मुस्काते बोले:-*" दिव्य बुद्धि से ड्रामा के हर राज़ को धारण करने वाली मेरी मीठी बच्ची, *ड्रामा ज्ञान के लेकर मूँझने वाली आत्माओं को एक बाप के सच्चे सच्चे रूप का अनुभव करासबके प्रति रहमभाव अपनाओं*किनारा करने वालों के भी सहारा बन विश्वकल्याण के कार्यों को मंजिल तक ले जाओं। *अविनाशी प्यार के धागे में हर आत्मा को पिरोकर ही अपनी अवस्था अविनाशी बनाओ... सभी के  कर्म भोग का वर्णन समाप्त कर कर्मयोग का जिक्र सुनो और सुनाओं*।

 _ ➳  *बुद्धि रूपी निर्मल आकाश में जगमगाते  एक मात्र शिव सूर्यऔर उनकी श्रीमत की दिव्य माला गले में धारण कियेमैं आत्मा विचार सागर मंथन से परफैक्ट बनती शिव शिक्षक से बोली:-*"बाबा आपके अविनाशी प्यार की सौगात ही सबको एक धागे से बाँधकर इस रूद्रज्ञान यज्ञ को सम्पूर्ण बना रही हैड्रामा के आदिमध्यअन्त का राज सब आत्माओं की बुद्धि में प्रत्यक्ष हो रहा हैआप ही करावन हार है बाबा! मैने तो हाँजी का पार्ट बजाया है... विचार सागर मंथन के लिए भी आप ही मेरी बुद्धि चला रहे है।... *ये गीता ज्ञान भी आप ही प्रत्यक्ष करा रहे है... सभी आत्माए एक शिव पिता के कल्याणकारी रूप का जयकार कर रही है... और बापदादा मन्द मन्द मुस्कुराते वरदानों से मुझे नवाज़ रहे है*।

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- सबके डूबे हुए बेड़े को श्रीमत पर पार लगाना है*"

 _ ➳  विश्व भ्रमण करता हुआ मैं फ़रिश्ता देख रहा हूँ सारी दुनिया के डूबे हुए बेड़े को। यहाँ - वहाँ चारों और भयानक दुख अशान्ति फैली हुई है। घर - घर में महाभारत छिड़ी हुई है। *आपसी प्यारस्नेह जैसे समाप्त हो गया है। माया रावण के वश होसभी एक दूसरे को दुख दे रहें हैं। अपने ही स्वभावसंस्कारों के कारण परेशान होदुखी हो रहें हैं किंतु उन्हें छोड़ नही पा रहें हैं। दुख और पीड़ा से तड़प रहें हैं और भगवान को पुकार रहें हैंहे प्रभु आओ हमारी रक्षा करो*। बेचारे इस बात से भी सर्वथा अंजान है कि सारी दुनिया के डूबे हुए बेड़े को पार लगाने वाला भगवानवो परम पिता परमात्मा जिसे वो पुकार रहें हैं वो परमात्मा इस धरा पर आ चुके हैं और अपनी श्रेष्ठ मत देकर सबके डूबे हुए बेड़े को पार लगा रहें हैं।

 _ ➳  विश्व की ऐसे हालत देखउनकी सहायता करने का संकल्प ले कर मैं फरिश्ता अब ऊपर आकाश की ओर उड़ जाता हूँ और आकाश को पार करउससे और ऊपर उड़ता हुआ अपने प्यारे बापदादा के अव्यक्त वतन में पहुंच जाता हूँ। *सफेद प्रकाश से प्रकाशित इस अव्यक्त वतन में मैं देख रहा हूँ अनेक फ़रिशतो को जो मेरे ही समान विश्व के डूबे हुए बेड़े को पार लगाने के परमात्म कर्तव्य में सहयोगी बनने का संकल्प ले कर आये हैं और परमात्म शक्तियाँ स्वयं में भरकर इस कर्तव्य को पूरा करने के लिए विश्व ग्लोब की ओर जा रहें हैं*। अपने प्यारे बापदादा को मैं देख रहा हूँ जिनके नयनों में अपने सहयोगी बच्चों के लिए अपार स्नेह स्पष्ट झलक रहा है।

 _ ➳  अपनी नजरों से निहाल करते बापदादाअपनी दृष्टि द्वारा अपनी शक्तियों का बल उनमे भर रहें हैं। इस खूबसूरत दृश्य को देखता हुआ मैं फ़रिश्ता बापदादा के पास पहुँचता हूँ और जा कर उनके समीप बैठ जाता हूँ। *अपनी मीठी दृष्टि से मुझे देखते हुए बापदादा मुझे अपने पास बुलाते हैं। बाबा से दृष्टि लेते हुएउस दृष्टि में समाई परमात्म शक्तियों से स्वयं को भरपूर होता हुआ मैं सपष्ट अनुभव कर रहा हूँ*। परमात्म बल मेरे अंदर भरता जा रहा है जो मुझे शक्तिशाली बना रहा है। अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखकर बापदादा मुझे सबके डूबे हुए बेड़े को श्रीमत पर पार लगाने का वरदान दे रहें हैं। *परमात्म शक्तियों से भरपूर होकरअपने आत्मा भाइयो की सहायता करने के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अब मैं विश्व ग्लोब की ओर चल पड़ता हूँ*।

 _ ➳  विश्व ग्लोब पर बैठ अपने प्यारे बापदादा का मैं आह्वान करता हूँ और उनकी छत्रछाया के नीचे स्वयं को अनुभव करता हुआअब मैं उनसे सर्वशक्तियाँ ले कर सारे विश्व में प्रवाहित कर रहा हूँ। *आपसी स्नेह और प्रेम के वायब्रेशन्स सारे विश्व में फैला रहा हूँ ताकि देह अभिमान के कारण सबके मन मे एक दूसरे के लिए जो नफ़रत पैदा हो चुकी है वो आपसी प्यार में बदल जाये। अपने जिन पुराने स्वभाव संस्कारों के कारण मनुष्य दुखी हो रहें हैं उनसे मुक्त हो जायें। *इन्ही शुभ भावनाओं और शुभ कामनाओं के साथ बापदादा के साथ कम्बाइन्ड होकर मैं सारे विश्व में परमात्म स्नेह की वर्षा कर रहा हूँ* और देख रहा हूँ परमात्म प्यार की वर्षा कैसे सबको परिवर्तित कर रही है। सबकी डूबी हुई नैया जैसे किनारे पर पहुँच रही है।

 _ ➳  परमात्म प्रेम और परमात्म शक्तियाँ चारों और फैलाता हुआ मैं फ़रिश्ता फिर से सारे विश्व का भ्रमण करता हुआ वापिस लौटता हूँ। *फिर से साकारी दुनिया में आकर मैं अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ और सबके डूबे हुए बेड़े को श्रीमत पर पार लगाने की अपनी प्रतिज्ञा को स्मृति में रखनिमित बन अपने कार्य क्षेत्र पर मिली सेवा को सम्पन्न करने में लग जाती हूँ*। शरीर निर्वाह अर्थ कर्म करते हुए इस ईश्वरीय कर्तव्य को भी अब मैं साथ - साथ कर रही हूँ। अपने हर संकल्पबोल और कर्म को श्रीमत पर चल श्रेष्ठ बनाकरपरमात्म प्यार और परमात्म पालना का अनुभव सबको करवाते हुएमैं *सबको परमात्म परिचय देकर उन्हें दुखों से छूटने और सदा सुखी होने का सहज उपाय बताकर उनके डूबे हुए बेड़े को पार लगाने की ईश्वरीय सेवा अब निरन्तर कर रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

✺   *मैं किसी से किनारा करने के बजाए सर्व का सहारा बनने वाली विश्व कल्याणकारी आत्मा हूँ ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

✺   *मैं कर्मभोग का वर्णन करने के बजाए, कर्मयोग की स्थिति का वर्णन करने वाली कर्मयोगी आत्मा हूँ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 अव्यक्त बापदादा :-

 _ ➳  *सभी को अपना निश्चय चाहिए कुछ भी हो जाएसाथ रहेंगेसाथ चलेंगेसाथ राज्य में आयेंगे।* पक्का है ना! साथ रहेंगे ना! बाप को अकेला छोड़के नहीं चले जाना। अकेला थोड़ेही अच्छा लगेगा। आपको भी अच्छा नहीं लगेगाबाप को भी अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए छोड़ना नहीं। *कोई भी बात आवे आप दिल से बोलोमेरा बाबाबाबा हाजिर है। आपकी समस्या को हल कर देंगे।दिल से बोलनाबाबा यह बात हैबाबा यह करो,बाबा यह... बाप बँधा हुआ है। लेकिन दिल सेऐसे नहीं कि मतलब के टाइम पर याद करो और फिर भूल जाओ।*

✺   *ड्रिल :-  "दिल से मेरा बाबा बोलकर समस्या से मुक्त होने का अनुभव"*

 _ ➳  *ओ बाबा आपने कैसा जादू फेरा है... जिसको देखो वही है कहता बाबा तो बस मेरा है... बाबा तो बस मेरा है... बाबा तो बस मेरा है* इस गीत को सुनते हुए... मैं बाप पसन्द दिव्य श्रेष्ठ आत्मा प्रभु महिमा के गीत गा रही हूँ... *और मन ही मन उस रत्नागरजादूगर का शुक्रिया कर रही हूँ... जिसने जादू चलाकर मेरे जीवन को क्या से क्या बना दिया...* मुझे जीना सीखा दिया... वाह बाबा कैसी आपने कमाल कर दी है... *कितनी सुन्दर हीरे तुल्य आप हमारी जीवन बना रहे हो बाबा... बाबा आप बहुत मीठे होकितने प्यारे हो...* प्यार के सागर बाबा भी रंग-बिरंगें स्नेह के फूलों की वर्षा मुझ आत्मा पर कररिस्पॉन्स दे रहे है... जैसे-जैसे मुझ आत्मा पर स्नेह के पुष्पों की वर्षा हो रही है... *मुझ आत्मा की चमक बढ़ रही है...*

 _ ➳  मैं आत्मा बाबा से कह रही हूँ... *मीठे लाडले बाबा आप हमेशा मेरे साथ ऐसे ही रहना... बाबा कुछ भी हो जाएसाथ रहेंगेसाथ चलेंगे,साथ राज्य में आयेंगे...* ऐसा कहते ही मुझ आत्मा के नयन सजल हो जाते है... *रिसपांस मेंबाबा से बेहद शक्तिशाली करंट अनुभव हो रही है...* और अचानक मुझ आत्मा के सामने एक दृशय आ जाता है... *मैं आत्मा देख रही हूँ... एक विशाल सागर में छोटी-छोटी नौकाएं चली हुई है... एक-एक नौका में सिर्फ़ एक-एक आत्मा बैठी हुई है...* और सभी साथ चलते हुए भीअपनी-अपनी रीति आगे बढ़ रहे है... *कुछ आत्माएँ प्रभु महिमा के गीत-गाते आगे बढ़ रही है... और कुछ अपने भाग्य के गीत-गाते हुए आगे बढ़ रहे है...* इन सबकी नौकाओं पर बाबा का झंड़ा लगा हुआ है... कुछ नौकाओं में बैठी आत्माएं यहाँ-वहाँ के नजारे देखते हुए... आगे बढ़ रही है...


 _ ➳  *तभी अचानक सागर में लहरें उठने लगती है... और सभी नौकाएं यहाँ-वहाँ हिलने लगती है... हिचकोले खाने लगती है...* तेज तूफान के साथ बारिश भी होने लगती है... तभी नांव में बैठी आत्माएं जो प्रभु महिमा के गीत गा रही थी... और *कुछ आत्माएँ जो भाग्य के गीत गा रही थी... इस तांड़व रुपी तूफान को देख घबराती नहीं है... और कहती है मेरे बाबा मीठे बाबामेरे साथी आ जाओं मदद करो मेरे बाबा और उनके ऐसे कहते ही बाबा आ जाते है...* बाबा उनकी तरफ एक दृष्टि देते है और उन आत्माओं का हाथ अपने हाथ में ले लेते है... और *उन आत्माओं की नौका एक बड़ी लहर के साथ जाकर आगे निकल जाती है... और चारों तरफ लहरें शांत हो जाती है... तूफान थम जाता है* और वो आत्माएं वाह बाबा वाह के गीत गाते हुए फिर से आगे बढ़ने लगती है...

 _ ➳  और दूसरी तरफ भी कुछ आत्माएँ जो पीछें लहरों-तूफान में फंसी है... घबरा भी रही है... और *उनके मन में कई प्रश्नों रूपी लहरे  उत्पन्न हो रही है... क्या करेंक्या होगा और साथ ही पुकार भी रही है... मेरे बाबा मीठे बाबा मदद करों...* बाबा उन आत्माओं के साथ ही खड़े है... मदद देने के लिए लेकिन वे आत्माएं बाबा की मदद नहीं ले पा रही है... तभी ये सारा दृश्य मुझ आत्मा के सामने से गायब हो जाता है... और मुझ आत्मा के कानों में बाबा के ये महावाक्य गूंजने लगते है... *"कोई भी बात आवे आप दिल से बोलनाबाबा यह बात हैबाबा यह करोंबाबा यह... बाप बँधा हुआ है... लेकिन दिल से"*  और मुझ आत्मा पर शक्तियों और वरदानों की किरणें बाबा से पड़ने लगती है... *मैं आत्मा बेहद शक्तिशाली अवस्था का अनुभव कर रही हूँ...  और अब इस दृश्य का राज मुझ आत्मा के सामने स्पष्ट होता जा रहा है...* मैं आत्मा बाबा को दिल से शुक्रिया कह रही हूँ... और अब मैं आत्मा देख रही हूँ स्वयं को इस धरा पर पार्ट प्ले करते हुए...

 _ ➳  *मैं आत्मा हर कर्म बाबा की याद मेंऔर अपने भाग्य की समृति में रह कर करते हुएअपनी जीवन रूपी नौका में बैठ मंजिल की तरफ बढ़ रही हूँ...* मैं आत्मा देख रही हूँ... इस जीवन रूपी नौका के चारों ओर कई प्रकार के बातों रूपी तूफान आ रहे है... लेकिन *मैं आत्मा दिल से मेरा बाबामीठा बाबामेरे साथी कह... बाबा की मदद से सहज ही हर समस्या को पार कर वाह बाबा वाह के गीत गाते खुशी और रूहानी नशे में रह कर आगे बढ़ रही हूँ...* बाबा के हाथ और साथ से सहज ही समस्या मुक्त हो आगे बढ़ रही हूँ... और *अन्य आत्माओं को भी आगे बढ़ा रही हूँ... आप समान बना रही हूँ... वाह बाबा वाह शुक्रिया लाडले बाबा...*

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

♔ ॐ शांति 
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