❍ 09 / 02 / 18 की मुरली से चार्ट ❍ TOTAL MARKS:- 100


∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

➢➢ *सवेरे सवेरे उठ बाप से गुड मोर्निंग की ?*

➢➢ *धैर्य, गंभीरता और समझ से बाप को याद किया ?*

➢➢ *यथार्थ श्रेष्ठ हैंडलिंग द्वारा सर्व की दुआएं प्राप्त की ?*

➢➢ *अपने श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता द्वारा अन्य आत्माओं की भटकती हुई बुधी को एकाग्र किया ?*
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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न* 
         ❂ *तपस्वी जीवन
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✧  आजकल के जमाने में डाक्टर्स कहते हैं दवाई छोड़ोएक्सरसाइज करो, *तो बापदादा भी कहते हैं कि युद्ध करना छोड़ोमेहनत करना छोड़ोसारे दिन में 5-5 मिनट मन की एक्सरसाइज करो। वन मिनट में निराकारीवन मिनट में आकारीवन मिनट में सब तरह के सेवाधारीयह मन की एक्सरसाइज मिनट की सारे दिन में भिन्न-भिन्न टाइम करो तो सदा तन्दरूस्त रहेंगेमेहनत से बच जायेंगे।*

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

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 *अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए* 
             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान* 
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   *"मैं निर्विघ्न स्थिति द्वारा हर कदम में तीव्रगति से आगे बढ़ने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"*

✧  सदा निर्विघ्न, सदा हर कदम में आगे बढ़ने वाली श्रेष्ठ आत्मायें हो ना! किसी प्रकार का विघ्न रोकता तो नहीं है? *जो निर्विघ्न होगा उसका पुरुषार्थ भी सदा तेज होगा क्योंकि उसकी स्पीड तेज होगी। निर्विघ्न अर्थात् तीव्रगति की रतार।* विघ्न आये और फिर मिटाओ इसमें भी समय जाता है। अगर कोई गाड़ी को बार-बार स्लो और ते]ज करे तो क्या होगा? ठीक नहीं चलेगी ना। विघ्न आवे ही नहीं उसका साधन क्या है?

  *सदा मास्टर सर्वशक्तिवान की स्मृति में रहो। सदा की स्मृति शक्तिशाली बना देगी। शक्तिशाली के सामने कोई भी माया का विघ्न आ नहीं सकता। तो अखण्ड स्मृति रहे। खण्डन न हो।* खण्डित मूर्ति की पूजा भी नहीं होती है। विघ्न आया फिर मिटाया तो अखण्ड अटल तो नहीं कहेंगे। इसलिए 'सदा' शब्द पर और अटेन्शन। सदा याद में रहने वाले सदा निर्विघ्न होंगे।

  संगमयुग विघ्नों को विदाई देने का युग है। जिसको आधा कल्प के लिए विदाई दे चुके उसको फिर आने न दो। सदा याद रखो कि हम विजयी रत्न हैं। विजय का नगाड़ा बजता रहे। विजय की शहनाईयाँ बजती रहती हैं, ऐसे याद द्वारा बाप से कनेक्शन जोड़ा और सदा यह शहनाईयाँ बजती रहें। *जितना-जितना बाप के प्यार में, बाप के गुण गाते रहेंगे तो मेहनत से छूट जायेंगे। सदा स्नेही, सदा सहजयोगी बन जाते हैं।*

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं
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✧  *बापदादा ने जो रूहानी एक्सरसाइज दी हैवह सारे दिन में कितने बार करते हो?* और कितने समय में करते होनिराकारी और फरिश्ता।

✧  बाप और दादाअभी-अभी निराकारीअभी-अभी फरिश्ता स्वरूप। दोनों में देह-भान नहीं है। तो *देहभान से परे होना है तो यह रूहानी एक्सरसाइज कर्म करते भी अपनी डयुटी बजाते हुए भी एक सेकण्ड में अभ्यास कर सकते हो।*

✧  *यह एक नेचुरल अभ्यास हो जाए - अभी-अभी निराकारीअभी-अभी फरिश्ता।* अच्छा (बापदादा ने ड़िल कराई)

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा के इशारे* 
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〰✧  *सिर्फ अपनी विस्मृति इन सब बातों को उत्पन्न करती है। चाहे पिछले संस्कारचाहे पिछले कर्म-बन्धनचाहे वर्तमान की भूले - जो भी कुछ होता हैउनका मूल कारण अपनी विस्मृति है।* अपनी विस्मृति के कारण यह सभी व्यर्थ बातें सहज को मुश्किल बना देती हैं। स्मृति रहने से क्या होगाजो लक्ष्य रखकर के आये हो स्मृति सम्पूर्ण विस्मृति असम्पूर्ण। *विस्मृति है तो बहुत ही विघ्न हैं और स्मृति है तो सहज और सम्पूर्णता।* अपनी बुद्धि को कण्ट्रोल करने के लिए कई बातों को हल्का करना पड़ता हैं। सभी से हल्की क्या चीज़ होती हैआत्मा (बिन्दी)। तो जब अपने को कण्ट्रोल करने लिए फुलस्टाप करना होता है। तो आप भी बिन्दी लगा दो। जो बीत चुका उसको बिल्कुल भूल जाओ।

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- सवेरे-सवेरे उठ बाप से गुडमॉर्निंग कर ज्ञान के चिन्तन में रहना"*

 _ ➳  *अमृतवेला शुद्ध पवन हैमेरे लाडले जागो कहते हुए मेरे बाबा मुझे उठाते हैं... मैं आत्मा अपने प्राण प्यारे बाबा को सामने देख मुस्कुराते हुए गुडमॉर्निंग कर उनकी गोद में समा जाती हूँ...* अमृतवेले के रूहानी समय में मैं आत्मा बापदादा का हाथ पकड पूरे ग्लोब कासूक्ष्मवतन कापरमधाम कासतयुगी दुनिया का चक्कर लगा रही हूँ... प्यारे बाबा की याद में लवलीन होकर विचार सागर मंथन कर मीठे बाबा से रूह-रिहान कर रही हूँ...

   *ढेर सारा याद प्यार देकरगुड मॉर्निंग कर मीठी समझानी देते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... *सवेरे सवेरे अपने सच्चे मीठे और प्यारे बाबा को गुडमोर्निग अवश्य करो... जनमो के बाद जो मीठा बाबा मिला है उसकी मीठी यादो के अनन्त सुख में खो जाओ...* मीठे पिता को ही जीओ और उसकी यादो में वैसा ही खूबसूरत बन जाओ...

 _ ➳  *मन दर्पण में एक बाबा की मूरत को बसाकर साँझसवेरे एक बाबा को ही निहारती हुई मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा अब शरीर के सारे नातो से न्यारी होकर मीठे बाबा की यादो में खोयी हूँ.... *बाबा ही मेरा संसार है... बाबा से ही जीवन का सवेरा है बाबा ही मेरे जीवन का आधार है इस नशे में डूबी हुई हूँ...”*

   *अपनी मीठी यादों के रंगों में मेरे जीवन के हर पल को रंगीन बनाते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे...अब देहधारियों को नही... अपने सच्चे सच्चे पिता को ही हर पल याद करो... *ये यादे ही सुनहरे सुखो से दामन सजाएंगी... जीवन को सच्चे प्यार और मधुरता से छलकायेगी... सवेरे उठकर मीठे बाबा को यादो में बसाओ...”*

 _ ➳  *पल-पल बाबा को प्यार से याद कर दिल ही दिल में उनसे बातें करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा कितनी महान भाग्य से सजी हूँ की सवेरे सवेरे उठकर ईश्वर पिता को गुडमॉर्निंग कर रही हूँ...* मेरी यादो  में स्वयं भगवान समाया है... अब इंसानी रिश्तो से ऊपर उठकर... *मै भगवान को चाहने वाली उसकी यादो में जीने वाली खुशनसीब आत्मा हूँ...”*

   *रिमझिम रिमझिम प्यार की बरसात में रूहानी प्यार का अनुभव कराते हुए मेरे बाबा कहते हैं:-* "प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... अब सच्ची यादो का छलकता मौसम आ गया है... भगवान स्वयं धरती पर बच्चों के आकर्षण में बन्ध उतर गया है तो सच्चे प्यार के मधुमास में खो जाओ.... *सवेरे सवेरे सच्चे माशूक की सच्ची बेपनाह मुहोब्बत में गहरे डूब जाओ...”*

 _ ➳  *यादों की रोशनी से सीप में मोती समान जगमगाती बाबा की प्यारी परी बनकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा सच्चे प्यार को पाकर कितनी प्यार भरी हो गयी हूँ... कभी धरती की मिटटी से खेलने वाली आज आसमानी माशूक की बाँहों में झूल रही हूँ... *सवेरे मीठा माशूक मुझसे मिलने आये और मै आत्मा उसकी बाँहों में समाकर स्वयं को ही भूल सी जाऊँ...”*

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- सबका प्यारा बनना है*"

 _ ➳  जो प्रभु प्रिय होता है वही सर्व का प्रिय होता है और प्रभु प्रिय वही बन सकता है जो सर्व से न्यारा होता है इसलिए बाप और सर्व का प्यारा बनने के लिए जरूरी है सर्व से न्यारा बनना। *यही विचार करते - करते मैं स्वयं से सवाल करती हूँ कि क्या मैं सर्व से न्यारी और बाप की प्यारी हूँ! जैसे कमल का फूल कीचड़ में रहकर भी उससे न्यारा और प्यारा रहता है ऐसे क्या मेरा जीवन भी कमल के पुष्प के समान न्यारा और प्यारा बन गया*! देह और देह की दुनिया में रहते हुए भी अपने स्वरूप की स्मृति में रह अपनी रूहानियत की खुशबू क्या मैं चारों ओर फैला रही हूँ! मनसावाचाकर्मणा क्या मैं सबको सुख देती हूँ! संकल्प में भी अपवित्रता का अंश मात्र भी मेरे अंदर रह तो नही गया!

 _ ➳  यही विचार करतेस्वयं की चेकिंग कर उसे चेंज करने का दृढ़ संकल्प मन मे धारण कर अपने उस संकल्प रूपी बीज को शक्तिशाली बनाने के लिए परमात्म याद रूपी जल से उसे सींचने के लिए अब मैं अपने मन को हर संकल्पविकल्प से मुक्त करबुद्धि को पूरी तरह अपने मस्तक के बीचों - बीच एकाग्र करते हुए अपने स्वरूप को देखने का प्रयास करती हूँ। *जैसे ही अपने स्वरूप पर मैं अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ मैं स्वयं को अशरीरी अनुभव करने लगती हूँ*। देह में होते हुए भी अब मैं स्वयं को देह से बिल्कुल अलग एक प्वाइंट ऑफ लाइट के रूप में स्पष्ट देख रही हूँ। *एक शक्ति जो इस देह को चला रही है किंतु देह से बिल्कुल न्यारी और प्यारी हैइस खूबसूरत एहसास का मैं स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ*।

 _ ➳  एक चमकते हुए चैतन्य सितारे के रूप में मुझे मेरा स्वरूप बहुत ही आकर्षक लग रहा है। मैं अपने अंदर छुपे हर गुण और शक्ति का अनुभव कर रही हूँ। *रंगबिरंगी किरणो के रूप में मुझ आत्मा के गुण और शक्तियाँ चारों और फैल रहें हैं और एक अद्भुतमन को तृप्त करने वाली दिव्य अनुभूति करवा रहें हैं*। अपने अंदर निहित गुणों और शक्तियों का अनुभव मुझे एक गहन सुखमय स्थिति में सहज ही स्थित कर रहा है। यह सुखमय स्थिति मुझे देह और देह की दुनिया से उपराम कर रही है। देह के हर बन्धन को त्याग कर मैं आत्मा अब विदेही बन ऊपर अपने शिव पिता के पास जा रही हूँ। *प्रभु यादों की डोली में बैठ मैं आत्मा सेकण्ड में साकार और सूक्ष्म वतन को पार कर पहुँच गई अपने शिव पिता के धाम उनके स्वीट साइलेन्स होम में*।

 _ ➳  अपने इस परमधाम घर में मैं देख रही हूँ महाज्योति के रूप में अपने शिव पिता परमात्मा को अपने बिल्कुल सामने। सर्व शक्तियों की अनन्त किरणे बिखेरता मेरे शिव पिता का सुन्दर सलौना स्वरूप मुझे अपनी और आकर्षित कर रहा है। *मैं चमकती हुई मणिचैतन्य ज्योति अब धीरे - धीरे महाज्योति के समीप जा कर जैसे ही उसे टच करती हूँ उस महाज्योति से आ रही सर्वशक्तियों की अनन्त किरणे मुझे अपने आगोश में ले लेती हैं*। ऐसा लग रहा है जैसे एक अद्भुत शक्ति मेरे अंदर भरती जा रही है। मेरे शिव पिता की सर्वशक्तियों का बल मुझे उनके समान तेजोमय बना रहा है। *स्वयं को मैं बहुत ही एनर्जेटिक अनुभव कर रही हूँ। मुझे मेरा स्वरूप बहुत ही चमकदार और लुभावना दिखाई दे रहा है*।

 _ ➳  अपने इस अति सुन्दर लुभावने स्वरूप के साथ अब मैं आत्मा परमधाम से नीचेसाकार सृष्टि पर कर्म करने के लिए वापिस साकारी दुनिया की ओर प्रस्थान करती हूँ। अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकरअपने शिव पिता के फरमान पर चलउनकी शिक्षायों को अपने जीवन मे धारण करअब मैं कमल पुष्प समान न्यारा और प्यारा बनने का पुरुषार्थ कर रही हूँ। *देह में रहतेस्वयं को देह से न्यारी ज्योति बिंदु आत्मा समझने और सबको देह से न्यारी आत्मा देखने का अभ्यास अब मैं निरन्तर कर रही हूँ*। मेरी रूहानी दृष्टि ने मेरे सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली सभी आत्माओं की दृष्टिवृति को परिवर्तित मुझे सहज ही सर्व की दुआओं के साथ - साथ सर्व का प्यारा भी बना दिया है।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

✺   *मैं यथार्थ श्रेष्ठ हैंडलिंग द्वारा सर्व की दुआयें प्राप्त करने वाली सर्व की स्नेही आत्मा हूँ ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

✺   *मैं अपने श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता द्वारा, अन्य आत्माओं की भटकती हुई बुद्धि को एकाग्र कर देने की सच्ची सेवा करने वाली सेवाधारी आत्मा हूँ  ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 अव्यक्त बापदादा :-

 _ ➳  वैसे बापदादा ने देखा है कि सेवा से लगन अच्छी है। सेवा के लिए एवररेडी हैंचाँस मिले तो प्यार से सेवा के लिए एवररेडी हैं। लेकिन अभी सेवा में एडीशन करो - *वाणी के साथ-साथ मनसाअपनी आत्मा को विशेष कोई- न-कोई प्राप्ति के स्वरूप में स्थित कर वाणी से सेवा करो*। मानो भाषण कर रहे हो तो वाणी से तो भाषण अच्छा करते ही हो लेकिन उस समय अपने आत्मिक स्थिति में विशेष चाहे शक्ति कीचाहे शान्ति कीचाहे परमात्म-प्यार कीकोई-न-कोई विशेष अनुभूति की स्थिति में स्थित कर मनसा द्वारा आत्मिक स्थिति का प्रभाव वायुमण्डल में फैलाओ और वाणी से साथ-साथ सन्देश दो। *वाणी द्वारा सन्देश दोमनसा आत्मिक स्थिति द्वारा अनुभूति कराओ*।

 _ ➳  *भाषण के समय आपके बोल आपके मस्तक सेनयनों सेसूरत से उस अनुभूति की सीरत दिखाई दे* कि आज भाषण तो सुना लेकिन परमात्म प्यार की बहुत अच्छी अनुभूति हो रही थी। *जैसे भाषण की रिजल्ट में कहते हैं बहुत अच्छा बोलाबहुत अच्छाबहुत अच्छी बातें सुनाईऐसे ही आपके आत्म-स्वरूप की अनुभूति का भी वर्णन करें। मनुष्य आत्माअों को वायब्रेशन पहुँचेवायुमण्डल बने। जब साइंस के साधन ठण्डा वातावरण कर सकते हैंसबको महसूस होता है बहुत ठण्डाई अच्छी आ रही है। गर्म वायुमण्डल अनुभव करा सकते हैं। साइंस सर्दी में गर्मी का अनुभव करा सकती हैगर्मी में सर्दी का अनुभव करा सकती हैतो आपकी साइलेन्स क्या प्रेम स्वरूपसुख स्वरूप,शान्त स्वरूप वायुमण्डल अनुभव नहीं करा सकती*। यह रिसर्च करो। सिर्फ अच्छा-अच्छा किया लेकिन अच्छे बन जायें,तब समाप्ति के समय को समाप्त कर अपना राज्य लायेंगे।

✺   *ड्रिल :-  "भाषण के साथ-साथ परमात्म प्यार की अनुभूति कराना "*

 _ ➳  प्राप्ति स्वरूप मैं आत्मा संगम की प्राप्तियों को साक्षी होकर देख रही हूँ... *समयस्वाँस और संकल्पों के खजाने से मालामाल मैं आत्मामेरे पास सेवा के ये अनूठे से साधन...* मनसा वाचा और कर्मणा... मेरे लिए अखुट कमाई का साधन है...

 _ ➳  प्रेम स्वरूप मैं आत्मापरमात्म प्यार में लीन देख रही हूँ स्वयं को भृकुटी के मध्य में... सुनहरे लाल प्रकाश से झिलमिलाती मैं मणि सम्पूर्ण देह को आलोकित कर रही हूँ... *मन में उठने वाले हर सकंल्प को पवित्रता की शक्ति से भरपूर करती मैं आत्मावाचा शक्ति को परमात्म प्रेम और गुणों के प्रकाश से भरपूर कर रही हूँ*... मेरी वाचा परमात्म प्यार और शक्तियों का स्वरूप प्रतीत हो रही है... 

 _ ➳  *देह में विराजमान मैं आत्मा नयनबोलमस्तक और सम्पूर्ण सूरत से परमात्म सीरत की अनुभूति करा रही हूँ*... प्रभु प्रेम में  मगन *मेरा बाबा मीठा बाबा* बोलती ये आँखें हर आत्मा को मेरे शान्त स्वरूप की अनुभूति करा रही है... मस्तक पर दमकती भाग्य रेखा मेरे उच्च भाग्य की झलक दिखा रही है... सूरत में और मेरे हर कर्म में बापदादा की सीरत प्रत्यक्ष हो रही है...

 _ ➳  *मुझसे निकलते प्रेम पवित्रता शान्ति और शक्तियों के वायब्रैशन शक्तिशाली वातावरण का निर्माण कर रहे है... अंग प्रत्यंग अपनी अपनी मूक भाषा में भाषण करते प्रतीत हो रहे है... वाणी से परमात्म गुणों का वर्णन करती मैं उन्हीं के गुण स्वरूप बनती जा रही हूँ*... मैं मनसा वाचा और कर्मणा परमात्म प्रेम की गहरी अनुभूति कर आस- पास की सभी आत्माओं को उन अनुभूतियों से भरपूर कर रही हूँ...

 _ ➳  *प्रकाश का झरना बहाते शिव बिन्दु मेरे सिर के ठीक ऊपर*... मैं नहाती जा रही हूँ इस लाल रंग के गहरे प्रकाश में... मेरे रोम रोम को अथाह ऊर्जा से भरपूर कर रहा हैये  प्रकाश... असीम शक्तियों की मैं मालिक मास्टर सर्व शक्तिमान की सीट पर सेट होकर मनसा द्वारा आत्मिक शक्तियों का प्रकाश फैलाती हुई... दूर दूर तक वातावरण में फैलता परमात्म प्यार फैलता जा रहा है...

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिलेचार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

♔ ॐ शांति 
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