❍ 26 / 01 / 18 की मुरली से चार्ट ❍ TOTAL MARKS:- 100


∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

➢➢ *सच्चे सच्चे खुदाई खिदमतगार बनकर रहे ?*

➢➢ *ज्ञान का विचार सागर मंथन किया ?*

➢➢ *मेरे पन की स्मृति से स्नेह और रहम और दृष्टि प्राप्त की ?*


➢➢ *बाप के अलावा अन्य किसी व्यक्ति व वैभव से प्यार तो नहीं रहा ?*
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 *अव्यक्त पालना का रिटर्न* 
         ❂ *तपस्वी जीवन
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✧  आजकल की दुनिया में राजनीति की हलचलवस्तुओ के मूल्य की हलचलकरैन्सी की हलचलकर्मभोग की हलचलधर्म की हलचल ऐसे *सर्व प्रकार की हलचल से हर एक तंग आ गये हैं। इससे बचने के लिए एकाग्रता को अपनाओएकान्तवासी बनो। एकान्तवासी से एकाग्र सहज ही हो जायेंगे।*

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

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 *अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए* 
             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान* 
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   *"मैं समर्थ बाप के संग में रहने वाली समर्थ आत्मा हूँ"*

   अपने को सदा समर्थ आत्मायें समझते हो! *समर्थ आत्मा अर्थात् सदा माया को चेलेन्ज कर विजय प्राप्त करने वाले। सदा समर्थ बाप के संग में रहने वाले। जैसे बाप सर्वशक्तिवान है वैसे हम भी मास्टर सर्वशक्तिवान हैं।* सर्व शक्तियाँ शस्त्र हैं, अलंकार हैं, ऐसे अलंकारधारी आत्मा समझते हो?

  *जो सदा समर्थ हैं वे कभी परिस्थितियों में डगमग नहीं होंगे। परिस्थिति से स्वस्थिति श्रेष्ठ है। स्वस्थिति द्वारा कैसी भी परिस्थिति को पार कर सकते हो।*

  जैसे विमान द्वारा उड़ते हुए कितने पहाड़, कितने समुद्र पार कर लेते हैं, क्योंकि ऊँचाई पर उड़ते हैं। *तो ऊँची स्थिति से सेकण्ड में पार कर लेंगे। ऐसे लगेगा जैसे पहाड़ को वा समुद्र को भी जम्प दे दिया। मेहनत का अनुभव नहीं होगा।*

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं
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✧  शक्ति स्वरूप आत्माओं का क्या स्वरूप दिखाया हैशक्तियों को (शक्ति स्वरूप में पाण्डव भी आ गये तो शक्तियाँ भी आ गई) *सदा शक्तियों को कोई को भूजाकोई को भूजाकोई को भूजाकोई को 16 भूजासाधारण नहीं दिखाते हैं।*

✧  यह भूजायें सर्व शक्तियों का सूचक हैं। इसलिए *सर्वशक्तिवान द्वारा प्राप्त अपनी शक्तियों को इमर्ज करो। इसके लिए यह नहीं सोचो कि समय आने पर इमर्ज हो जायेंगी लेकिन सारे दिन में स्वयं प्रति भिन्न-भिन्न शक्तियाँ यूज करके देखो।*

✧  सबसे पहला अभ्यास स्वराज्य अधिकार सारे दिन में कहाँ तक कार्य में लगता हैमैं तो हूँ ही आत्मा मालिकयह नहीं। *मालिक होके ऑर्डर करो और चेक करो कि हर कर्मेन्द्रियाँ मुझ राजा के लव ऑर लॉ में चलते हैंऑर्डर करें - मनमनाभवऔर मन जाये निगेटिव और वेस्ट थाट्स में,क्या यह लव और लॉ रहा?*

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति* 
 *अव्यक्त बापदादा के इशारे* 
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〰✧  अव्यक्त स्थिति की पालिश ही बाकी रही है। *आपस में बातचीत करते समय आत्मा रूप में देखो। शरीर में होते हुए भी आत्मा को देखो। यह पहला पाठ है।* इसकी ही आवश्यकता है। *जो भी सभी धारणायें सुनी हैंउन सभी को जीवन में लाने लिये यही पहला पाठ पक्का करना पड़ेगा।* यह आत्मिक-दृष्टि की अवस्था प्रैक्टिकल में कम रहती है। *सर्विस की सफलता ज्यादा निकलेउसका भी मुख्य साधन यह है कि आत्म-स्थिति में रह सर्विस करनी है। पहला पाठ ही पालिश है।* इसकी ही आवश्यकता है। कब नोट किया है - सारे दिन में यह आत्मिक-दृष्टिस्मृति कितनी रहती है? *इस स्थिति की परख अपनी सर्विस की रिजल्ट से भी देख सकते हो। यह अवस्था शमा है।*

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- ज्ञानसूर्य बाप से सम्मुख पढ़ मोती चुगने वाले हंस बनना"*

 _ ➳  खुले आंगन में प्रकृति की गोद में मैं आत्मा बाबा की याद में बैठी हूँ... मन अपने श्रेष्ठ भाग्य की महिमा के गीत गुनगुना रहा है... बाबा ने मुझे अपना बनाकर क्या से क्या बना दिया... *कहाँ भक्ति में उसकी एक झलक पाने के प्यासे थे... अब उससे हर पल मिलन मनाने का भाग्य मिल गया है... उसने अपने दिलतख्त पर बिठाके मुझे अपनी दिलरूबा बना दिया है...* तभी बारिश की हल्की हल्की बूँदें मुझ पर बरसने लगती हैं... ये बूँदें ज्ञान सागर की ज्ञान वर्षा में भीगने और आनंदित होकर झुमने का अनुभव करा रही हैं...

  *ज्ञान सागर बाबा अपनी ज्ञान की वर्षा करते हुए कहते हैं :-* मीठे मीठे फूल बच्चे... तुम्हें नशा होना चाहिए की तुम्हें... पढाने वाला टीचर कौन है... स्वयम भगवानप्यार का सागरआनंद का सागरशांति का सागर बाबा तुम्हें पढ़ा रहे हैं... *तुम भाग्यवान आत्माएं ज्ञान सूर्य के सम्मुख बैठ यह रूहानी पढाई पढ़ रहे हो... सदा अपने इस भाग्य के नशे में रहो...*

 _ ➳ *बाबा की मधुर वाणी सुनकर आनंद विभोर होती हुई मैं आत्मा कहती हूँ :-* मेरे जीवन के आधार मीठे बाबा... *संगम पर मुझ आत्मा को ज्ञान सूर्य बाप के सम्मुख बैठ... रूहानी पढ़ाई पढने का श्रेष्ठ भाग्य मिला है... मैं आत्मा सदैव इस खुमारीनशे में स्थित हो रही हूँ...* आपसे मिले हुए ज्ञान की हर पॉइंट की अनुभवी मूर्त बनती जा रही हूँ...

   *ज्ञान के दिव्य खजानों से मुझे लबालब करते हुए ज्ञान सागर बाबा कहते हैं :-* मेरे मीठे सिकिलधे बच्चे... अब तुम्हारी हंस मण्डली बन गयी है... तुम बगुले से हंस बन गये हो... *अब तुम अवगुणों का चिन्तन नहीं कर सकते... अब तुम ज्ञान मोती चुगने वाले हंस बुद्धि बन गये हो... तुम व्यर्थ और समर्थ में से सदा समर्थ को ही ग्रहण करो... श्रेष्ठ ज्ञान रत्नों को ही जीवन में धारण करो...*

 _ ➳  *बाबा से मिल रहे असीम स्नेह से गदगद होती हुई मैं आत्मा कहती हूँ :-* मेरे मन के मीत मीठे बाबा... *आप मुझे व्यर्थ और समर्थनीर और क्षीरकंकड़ और मोती को अलग अलग परखने की शक्ति... दिव्य बुद्धि दे रहे हैं...* मैं आत्मा होलीहंस बन... सदैव ज्ञान रत्नों को ही धारण कर रही हूँ... मैं ज्ञान मोती चुगने वाला... होलीहंस बनती जा रही हूँ...

  *अपनी मधुर दृष्टि से वरदानों की वर्षा करते हुए बाबा कहते हैं :-* मीठे प्यारे बच्चे... बाबा तुम्हें ज्ञान रत्नों की थालियाँ भर भर के दे रहे हैं... *तुम उन्हीं ज्ञान रत्नों से सदा खेलते रहो... ज्ञान की नयी नई पॉइंट्स लेकर... उस पर विचार सागर मंथन करते रहो... बाबा तुम्हें ज्ञान खजाने से भरपूर कर रहे हैं... इस खजाने को विश्व की... सर्व आत्माओं को बांटते चलो...* 

 _ ➳  *बाबा की शिक्षाओं को स्वयम में धारण करती हुई मैं आत्मा कहती हूँ :-* मेरे मीठे प्यारे बाबा... आपने मुझे ज्ञान खजानों का मालिक बना दिया है... *मेरी बुद्धि को शुद्ध सोने का बर्तन बना दिया है... जिसमें मैं ज्ञान रत्नों को धारण कर रही हूँ... ज्ञान की एक एक पॉइंट पर... विचार सागर मंथन कर उसका स्वरूप बनती जा रही हूँ...* ज्ञान खजानों का दान कर सर्व को... आप समान बनाने की सेवा कर रही हूँ... खजानों को बांटते बांटते मेरा यह खजाना... और भी बढ़ता जा रहा है...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

✺   *"ड्रिल :- सच्चे - सच्चे खुदाई खिदमतगार अथवा ईश्वरीय सेलवेशन आर्मी बन सबको माया से लिबरेट करना है*"

 _ ➳  5 विकारों रूपी माया रावण की जेल में कैद सभी आत्मा रूपी सीताओं को इस जेल से छुड़ायेउन्हें सेल्वेज करने के लिए स्वयं जगत के नियन्ता प्रभु राम अर्थात *परम पिता परमात्मा शिव बाबा ने आकर जो ईश्वरीय सेल्वेशन आर्मी बनाई हैउस ईश्वरीय सेल्वेशन आर्मी का प्रमुख सैनिक और अपने प्रभु राम का सच्चा - सच्चा खुदाई खिदमतगार बन सभी आत्मा रूपी सीताओं को रावण की कैद से छुड़ाना और सबको माया से लिबरेट करना हर ब्राह्मण बच्चे का मुख्य कर्तव्य है*।

 _ ➳  इस बात को स्मृति में लाकर अपने लाइट के फ़रिश्ता स्वरूप को धारण करसच्चा - सच्चा खुदाई खिदमतगार बन सबको माया से लिबरेट करने केअपने खुदा बाप के फरमान का पालन करने के लिए मैं उड़ चलता हूँ ऊपर की ओर। *सारे विश्व मे भ्रमण करते हुए मैं देख रहा हूँ विश्व की सर्व आत्माओं को जो विकारों की अग्नि में जल रही हैं। माया रावण के चंगुल से छूटने का भरसक प्रयास कर रही हैं किन्तु सामर्थ्य ना होने के कारण उसके आकर्षक जाल में और ही फँस कर दुर्गति को पाती जा रही हैं*।

 _ ➳  अपने इन सभी आत्मा भाइयों को माया से लिबरेट करने के लिये अब मैं अपने प्यारे बापदादा का आह्वान करती हूँ। *बापदादा के साथ कम्बाइंड हो करविश्व ग्लोब पर बैठबापदादा से सर्वशक्तियाँ ले कर अब मैं विश्व की सर्व आत्माओं में प्रवाहित कर रही हूँ*। विकारों कामक्रोध,लोभमोहअहंकार की अग्नि में जल रही आत्माओं पर ये शक्तियां शीतल फुहारों के रूप में बरस कर विकारों की अग्नि को शांत करउन्हें शीतलता का अनुभव करवा रही है। *शीतलता की यह अनुभूति उन्हें सुकून दे रही हैं। सर्व आत्माओं को परमात्म सन्देश और परमात्म परिचय मिल रहा है*।

 _ ➳  सच्चा सच्चा खुदाई ख़िदमतगार बन विश्व की सर्व आत्माओं को परमात्म परिचय दे करउन्हें माया से लिबरेट होने का सहज रास्ता बता करअब मैं स्वयं को परमात्म बल से भरपूर करने के लिए अपने निराकारी स्वरूप में स्थित होकर अपनी निराकारी दुनिया की ओर चल पड़ती हूँ। *विश्व ग्लोब से ऊपरसूक्ष्म वतन को पार कर मैं पहुंच जाती हूँ निराकारी आत्माओं की दुनिया परमधाम में। परमधाम में अपने मीठे प्यारे शिव बाबा के सानिध्य में बैठ अब मैं स्वयं को उनकी सर्वशक्तियों से भरपूर कर रही हूँ*।

 _ ➳  ऐसा लग रहा है जैसे बाबा अपनी सारी शक्तियाँ मुझ आत्मा में भरकर अपनी समस्त पावर मेरे अंदर समाहित कर रहे हैं ताकि *संपूर्ण ऊर्जावान बन मैं विश्व की सर्व आत्माओं कोजो विकारों रूपी माया रावण की जेल में फंस कर दुखी हो रही हैं और उसकी कैद से छूटने के लिए छटपटा रही हैंउन सबको माया से लिबरेट करपरमात्म शक्तियों से उन्हें बलशाली बना कर विकारों से मुक्त होने का बल उनमें भर सकूँ*।

 _ ➳  परमात्म शक्तियों से स्वयं को भरपूर करसम्पूर्ण ऊर्जावान बन अब मैं परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और साकारी दुनिया मे आकर अपने साकारी तन में प्रवेश करअपने ब्राह्मण स्वरूप को धारण कर लेती हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरुप में स्थित होकर सच्चा - सच्चा खुदाई ख़िदमतगार बन,अपने शुद्ध और श्रेष्ठ संकल्पों की शक्ति सेसबको माया से लिबरेट करने की ऑन गॉडली सर्विस पर अब मैं सदैव तत्पर रहती हूँ*। सेल्वेशन आर्मी बन सबको विकारों की दुबन से निकाल उन्हें सेल्वेज करने का रूहानी धन्धा अब मैं हर समय कर रही हूँ।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

✺   *मैं मेरे - पन की स्मृति से स्नेह और रहम की दृष्टि प्राप्त करने वाली समर्थी सम्पन्न आत्मा हूँ ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)
( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

✺   *मैं बाप की प्यारी बनकर अन्य किसी व्यक्ति वा वैभव से प्यार नहीं अनुभव करने वाली न्यारी आत्मा हूँ  ।*

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?
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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 अव्यक्त बापदादा :-

 _ ➳  बापदादा सदा टीचर्स को इसी नजर से देखते हैं *हर टीचर के फीचर्स में बापदादा के फीचर्स दिखाई दें। फेस में ब्रह्मा बाप के फीचर्स और भ्रकुटी में ज्योतिबिन्दु के फीचर,* किसी भी टीचर को देखो तो सबके मुख से यही निकले कि *यह तो बाप समान हैं। यह तो ब्रह्मा बाबा जैसे लगते हैं,यह तो शिव बाप जैसे लगते हैं।* हैं भी और होने ही हैं। तो टीचर्स आधारमूर्त हैं। जैसे बाप के लिए कहते हैं - *ब्रह्मा बाप का सदा यही स्लोगन रहा'जो कर्म मैं करूँगा वह सब करेंगे'। ऐसे हर एक टीचर को यही स्लोगन सदा याद रहता है कि 'जो कर्मजो बोलजो वृत्तिजो विधि हम करेंगेहमें देख सर्व करेंगे'।*

 _ ➳  *बापदादा ने ब्रह्मा बाप की गद्दी आप टीचर्स को बैठने के लिए दी है। मुरली सुनाने के लिए निमित्त टीचर्स हैंबाप की गद्दी मिली हुई है।* ड्रामा ने आप टीचर्स को बहुत-बहुत ऊँचा मर्तबा दिया है। *बापदादा भी सदा टीचर्स को इसी विशेष महत्व से देखते हैं। महान होमहत्व वाले हो।* है ना ऐसेकभी स्टूडेन्ट से सर्टीफिकेट लेवेंबापदादा तो देखते रहते हैं। (बाबा टीचर्स को पकड़ो) यह तो प्रेम में पकड़ी हुई हैं तब तो टीचर्स बनी हैं। अभी कान दादी पकडेंगीबाप तो प्यार में पकड़ेंगे। फिर भी हिम्मत रखकर निमित्त तो बनी हैं ना! (दादी कह रही हैं टीचर्स बहुत अच्छी हैं) बहुत अच्छी हो,मुबारक हो। अच्छे तो हैं ही। अगर टीचर्स नहीं होती तो इतने सेन्टर्स कैसे खुलते। मुबारक हो आप सबको। बापदादा तो बहुत-बहुत श्रेष्ठ नजर से देखते हैं। टीचर्स भी बहुत आई हैं। अच्छी हैं - हिम्मत और मेहनत में मुबारक हो।

✺   *ड्रिल :-  "बाप समान टीचर बनने का अनुभव"*

 _ ➳  कोटो में कोई... कोई में भी कोई मैं सौभाग्यशाली आत्मा... बैठी हूँ... *एक बाप की याद में... बिन्दुरूपी बाप की याद में... मन... वचन... कर्म... से एक बाप को समर्पित...* ब्रह्मामुख वंशावली ब्राह्मण आत्मा मैं... ड्रामा के राज को जान... अपने संगमयुग को यथार्थ रीति सफल कर रही हूँ... *स्वयं भगवान ने जिसे सराहा वह मैं आत्मा... पावन... पवित्र... बन रही हूँ... प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मैं रूहानी स्टूडेंट... रूह बन कर... रूहानी बाप को याद कर रही हूँ...*

 _ ➳  *अकाल तख्त पर विराजमान मैं आत्मा...* रूह बन कर... उड़ चली हूँ... रूहानी वतन में... मेरे रूहानी पिता से मिलने... सुनहरा लाल प्रकाश छाया हैं जहाँ... नीरव शांति फैली हैं जहाँ... न देह हैं न देह के संबंध हैं... *अपने बिंदु रूपी पिता के सन्मुख... प्यार के सागर के सम्मुख... प्यार से परिपूर्ण होती जा रही हूँ...* बाबा से आती हुई सर्व शक्तियों रूपी रंग बिरंगी किरणों को मैं आत्मा धारण कर रही हूँ... अपने आप को संपूर्ण करती जा रही हूँ... *63 जन्मों के विकारों को उसकी किरणों में स्वाहा होता देख रही हूँ...*

 _ ➳  बाबा के संग चलती मैं आत्मा... पहुँचती हूँ सूक्ष्म वतन में... जहाँ ब्रह्मा बाबा... और सभी एडवांस पार्टी की आत्मायें हमारा ही इंतजार कर रही थी… *ब्रह्मा बाप के तन में शिवबाबा का अलौकिक अवतरण* को मैं आत्मा देख रही हूँ... और *मैं आत्मा भी अपने लाइट के फ़रिश्ते स्वरुप में परवर्तित हो गई हूँ...* मुझ फ़रिश्ता स्वरुप आत्मा का भव्य... सत्कार हो रहा हैं... सुगन्धित फूलों की वर्षा हो रही हूँ... मुझ आत्मा को डबल ताज से नवाजा जा रहा हैं... सफ़ेद मोतियों की माला से श्रृंगार हो रहा हैं...

 _ ➳  और मैं आत्मा अचरज भरी निगाहों से देख रही हूँ... मेरा हाथ पकडे सभी मुझे एक दिव्य सिहांसन पर बिठाते हैं... और तब *बापदादा का दिव्य... अलौकिक... भव्य स्वरुप* देख कर मैं आत्मा भाव विभोर हो जाती हूँ... बापदादा एक बड़े से लाल गोले में एक सीन दिखा रहे हैं... ब्रह्माकुमारी का सेंटर हैं... बहुत ब्राह्मण आत्मायें सफ़ेद वस्त्रों में सज्ज... बापदादा का झंडा लिए खड़े हैं... और सब से आगे मैं आत्मा खड़ी हूँ... *सफ़ेद साडी में सज्ज... लक्ष्मी नारायण का बैच पहने... हाथ में बापदादा का झंडा लहराती... मुझ आत्मा का दिव्य स्वरुप नजर आ रहा हैं...*

 _ ➳  *मै आत्मा अपने आप को समर्पित टीचर के रूप में देखती हूँ...* तेजोमय किरणों के आभा मंडल से सज्ज मेरा रूप... बापदादा का साक्षात्कार करवा रहा हैं... नैनो में रूहानियत छलक रही हैं... बोल में मधुरता ही मधुरता हैं... मुझ आत्मा से बापदादा की प्रत्यक्षता हो रही हैं... *फेस में ब्रह्मा बाप के फीचर्स और भ्रकुटी में ज्योतिबिन्दु के फीचर... दिखाई दे रहे हैं...* बापदादा को प्रत्यक्ष करने में मैं आत्मा... मंसा... वाचा... कर्मणा... समर्पित हो गई हूँ... *मुरली सुनाने के लिए निमित्त समर्पित टीचर मैं आत्मा... बाप की गद्दी की वारिसदार बन गई हूँ...*

 _ ➳  फ़रिश्ता स्वरुप मै आत्मा... अपना ही समर्पित टीचर के रूप को देख के आनंदित हो जाती हूँ... *एडवांस पार्टी की सभी आत्माओं द्वारा आशीर्वचनों को प्राप्त करती मैं आत्मा...* सब की लाडली बन गई हूँ... बापदादा से आती हुई सौभाग्यशाली किरणों को अपने में धारण कर मैं आत्मा.. बापदादा को धन्यवाद करती थकती नहीं हूँ... मुझ आत्मा को अपना बनाया... *रंक से राजा बनाने वाले तेरा कोटि बार शुक्रिया...* शुक्रिया मेरे बाबा शुक्रिया बोलती मै आत्मा अपने हर लौकिक कार्य को... बापदादा की सेवा को निम्मित समझ कर पूरा कर रही हूँ...

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

♔ ॐ शांति 
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