∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks:
3*5=15)
➢➢ *मंसा में,
चाहे
वाणी में, कर्म में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में अशुद्धि से दूर रहे ?*
➢➢ *विकारों के
वशीभूत हो उल्टी होशियारी तो नहीं दिखाई ?*
➢➢ *सदा मेले में रह
स्वच्छ बनकर रहे ?*
∫∫ 2 ∫∫ विशेष अभ्यास (Marks:2*10=20)
➢➢ *नालेज की शक्ति
से अपने वा दूसरे के अवगुण को भस्म किया ?*
➢➢ *दूसरे के अवगुण
का वर्णन कर स्वयं परचिन्तन के अवगुण के वशीभूत तो नहीं हुए ?*
∫∫ 3 ∫∫ विशेष पुरुषार्थ
(Marks: 15)
( इस रविवार की अव्यक्त मुरली से... )
➢➢ *सच्चे वैष्णव
अर्थात सदा गुण ग्राहक बनकर रहे ?*
∫∫ 4 ∫∫ बाबा से
रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की मुरली के सार पर आधारित... )
➢➢ *"सच्चे वैष्णव अर्थात सदा गुण
ग्राहक"*
❉ *प्यारे बाबा :-* "मेरे मीठे फूल
बच्चे... आज बापदादा हर फूल बच्चे के गुणो की माला तैयार कर रहे है.. इन प्यारे
गुणो ने ही प्रभु की पसन्द बनाया है... तो हर आत्मा में गुण के मोती देखने वाले
होलिहंस बन मुस्कराओ... *मा ज्ञान सूर्य बन अवगुण रुपी किचडे को भस्म करने वाले
शुभचिंतक बनो*.. सदा सबकी विशेषताओ को देखने वाले सच्चे सच्चे वैष्णव बनो..."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा दिव्य नजरो से विश्व को देखने वाली
वैष्णव बन गयी हूँ... हर आत्मा गुणो से सम्पन्न है... *सबके गुणो को निहारकर मै
आत्मा स्वयं गुणो की माला बन रही हूँ..*. गुणो से श्रंगारित हर आत्मा को भाई की
नजर से देख समभाव की लहर फेला रही हूँ..."
❉ *मीठे बाबा :-* "मीठे प्यारे फूल
बच्चे... संगम के खुबसूरत वरदानी समय में श्रेष्ठ प्राप्तियों से स्वयं को लबालब
करो... अवगुणी दृष्टि को बदल, शुभभाव का संचार करो...कर्मगति को सदा
स्म्रति में संजो दो... अल्पकाल के नाम मान के पीछे, सदा की
प्राप्तियो को न गंवाओ... *हर कर्म प्रभु पसन्द हो यह दिल में गहरे समा
दो*..."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"मेरे प्राणप्रिय बाबा... मैं आत्मा आपकी यादो में मनसा वाचा कर्मणा सम्पूर्ण
पवित्रता को अपनाकर... खुबसूरत दिल की मल्लिका हो गयी हूँ... *पूरा विश्व मेरा ही
परिवार है.*..इस खुबसूरत भावना से ओतप्रोत हर दिल को आत्मिक सम्मान दे रही हूँ...
गुणग्राही दृष्टि से सज गयी हूँ..."
❉ *प्यारे बाबा :-* "मेरे सिकीलधे
मीठे बच्चे... ऊँच ते ऊँच बाप के बच्चे अब मिटटी में खेल मटमैले न बनो... सदा
स्वचिंतन में मस्त रहो... बीती को बिंदी लगा बिन्दु बाप के साथ बिन्दु बन उड़
चलो... *सदा सेवाओ में निर्माण रह बेफिक्र हो मुस्कराओ.*.. ज्ञानरत्नो के खजाने से
सबको मुक्ति जीवनमुक्ति का अनुभव कराने वाले बन्धनमुक्त बन मुस्कराओ..."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"हाँ मेरे मीठे बाबा... मैं आत्मा ज्ञान रत्नों के अथाह खजानो को हर दिल पर
लुटा रही हूँ... *रूहानी सेवाधारी बनकर हर दिल आत्मा को मीठे बाबा से सर्व
सम्बन्धो की अनुभूति करा रही हूँ.*.. और अपनी शक्तिशाली वृत्ति से वायुमण्डल को
परिवर्तन कर रही हूँ..."
∫∫ 5 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली की धारणा पर आधारित... )
✺ *"ड्रिल :- आज की मुरली से बाबा की 4
निमनलिखित शिक्षाओं की धारणा के लिए विशेष योग अभ्यास*"
❶
*अवगुणों को भस्म करना*
❷
*परचिन्तन न करना*
❸
*अशुधि से दूर रहना*
❹
*उल्टी होशियारी न दिखाना*
➳ _ ➳ मन में
शक्तिशाली बनने का दृढ संकल्प लिए मैं आत्मा मन बुद्धि से पहुँच जाती हूँ शांति
स्तम्भ के पास। *शांति के शक्तिशाली प्रकम्पन इस महाशक्तिस्तम्भ से निकल कर चारों
ओर फ़ैल रहें हैं। मेरे चारों ओर शांति का एक बहुत ही विशाल औरा बना हुआ हैं जो
मुझे असीम शांति का अनुभव करवा रहा है*। अनन्त शक्तियों की किरणें इस महाशक्ति
स्तम्भ से निकल कर मुझ आत्मा में प्रवेश कर रही हैं और मुझे शक्तिशाली बना रही
हैं। अव्यक्त बापदादा की अव्यक्त आवाज इस शांति स्तम्भ के चारों और गूंजते हुए
स्पष्ट सुनाई दे रही है जैसे बाबा कह रहे हैं बच्चे - "शक्तिशाली बनना चाहते
हो तो शांति स्तम्भ पर पहुँच जाना"।
➳ _ ➳ शक्तिशाली
स्थिति में स्थित हो कर लाइट का सूक्ष्म आकारी शरीर धारण कर फ़रिश्ता बन अब मैं
पहुँच जाता हूँ बाबा के कमरे में। यहां भी बापदादा की अव्यक्त आवाज सुनाई दे रही
है। *बाबा कह रहे हैं बच्चे -"बाप समान बनने का दृढ संकल्प उतपन्न हो तो
बापदादा के कमरे में आ जाना"*। बापदादा के चित्र के आगे मैं खड़ा हूँ और अनुभव
कर रहा हूँ जैसे अव्यक्त बापदादा मेरे सामने उपस्थित हो कर अपना वरदानीमूर्त हाथ
मेरे सिर पर रख कर मुझे आप समान बना रहे हैं।
➳ _ ➳ बाप समान स्थिति
का अनुभव करते हुए अब मैं फ़रिश्ता हिस्ट्रीहॉल में पहुँच जाता हूँ।बापदादा की
अव्यक्त आवाज यहां भी स्पष्ट सुनाई दे रही है। *बाबा कह रहे हैं बच्चे
"व्यर्थ संकल्प बहुत तेज चल रहे हो तो हिस्ट्री हाल में पहुंच जाना"*।
मैं फ़रिश्ता हिस्ट्रीहाल में लगे एक एक चित्र को देख रहा हूँ। यज्ञ के आदि रत्नों
को देखते हुए मैं स्पष्ट अनुभव कर रहा हूँ कि मेरे सकल्पो की गति बहुत ही धीमी है।
इन आदि रत्नों के चित्रों को देखते देखते मैं स्वयं को शक्तिशाली स्थिति में अनुभव
कर रहा हूँ।
➳ _ ➳ शक्तिशाली स्थिति
का अनुभव करते करते अब मैं फ़रिश्ता बाबा की कुटिया में पहुँच जाता हूँ। यहां बैठते
ही फिर से वही अव्यक्त आवाज सुनाई देती है। *जैसे बाबा कह रहे हैं बच्चे-"कब
उदास हो जाओ तो बाप से रूह रिहान करने झोपड़ी में पहुँच जाना"*। इस अव्यक्त
आवाज को सुनते सुनते मैं फ़रिश्ता अनुभव करता हूँ कि अव्यक्त बापदादा मेरे सामने
उपस्थित हो कर अब मुझ से रूहरिहान कर रहें हैं।
➳ _ ➳ मीठी मीठी
समझानी देते हुए बाबा कह रहे हैं - मेरे मीठे बच्चे "अब अवगुणों को भस्म
करो"। केवल अवगुणों को जानना और देखना नॉलेजफुल बनना नही है। *नॉलेज को लाइट
और माइट कहा जाता है इसलिए अब नॉलेज की शक्ति से अपने वा दूसरों के अवगुणों को
भस्म करो। जब नॉलेज की लाइट और माइट को काम में लाएंगे तभी नॉलेजफुल कहलायेंगे*।
इसलिए नॉलेजफुल बन अवगुणों को भस्म करने के साथ साथ यह भी याद रखो कि परचिन्तन कभी
नही करना। अगर दूसरे के अवगुण रूपी किचड़े को देखते भी हो तो मास्टर ज्ञान सूर्य बन
उस किचड़े को जलाने की शक्ति स्वयं में धारण करने वाले शुभ-चिन्तक बनो। *किसी के
अवगुणों का मुख से वर्णन नही करो बल्कि हर आत्मा को सदा गुणमूर्त से देखो*।
➳ _ ➳ अशुद्धि से सदा
दूर रहो। जितना हो सके शुभ भावना से इशारा दे दो। अशुद्धि को न अपने मन में रखो और
न औरों को मन्मनाभव होने में विघ्न रूप बनो। *मंसा में, चाहे वाणी में,
कर्म
में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में अशुद्धि, संगमयुग की श्रेष्ठ प्राप्ति से वंचित
बना देगी*। समय बीत जायेगा। फिर ‘‘पाना था'' इस लिस्ट में
खड़ा होना पड़ेगा। प्राप्ति स्वरूप की लिस्ट में नहीं होंगे। इसलिए अपनी प्राप्ति
में लग जाओ। *शुभचिंतक बनो। किसी भी प्रकार के विकारों के वशीभूत हो अपनी उल्टी
होशियारी नहीं दिखाओ*। उल्टी होशियारी उल्टा लटकायेगी अल्पकाल के लिए नाम, मान,
शान
भले पा लेंगे लेकिन अनेक जन्मों के लिए श्रेष्ठ पद से नाम गंवा लेंगे। इसलिए कर्म
की गति को भी स्मृति में रखो और उलटी चलन से बचो।
➳ _ ➳ चारों धाम की
यात्रा और बाबा से मीठी मीठी रूहरिहान करके, *बाबा की समझानी
को अपने मन की किताब में अंकित करके उसे पूरा करने की बाबा से दृढ प्रतिज्ञा कर
मैं फ़रिश्ता अपने ब्राह्मण स्वरूप में लौट आता हूँ*।
∫∫ 6 ∫∫ स्वमान का
अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )
✺ *"ड्रिल :- मैं आत्मा सर्व बंधनमुक्त
हूँ।"*
➳ _ ➳ अपनी अनंत दैवीय
शक्तियों को साकार में... इस संगमयुग में अनुभव करने वाली मैं मास्टर सर्वशक्तिमान
आत्मा... अपनी आत्मिक स्थिति में स्थित होकर बापदादा का आह्वान कर रही हूँ...
*मेरी प्यार भरी पुकार सुनकर बाबा अपना धाम छोड़कर ब्रह्मा बाबा के भाल तख्त पर...
विराजमान होकर आ रहे हैं...* हजारों सूर्य की किरणों से चमकता हुआ ललाट... अति
तेजस्वी रूप ब्रह्मा बाबा का दिखाई दे रहा है...
➳ _ ➳ अलौकिक रूप मेरे
बापदादा का प्रत्यक्ष... देख कर मैं आत्मा... भाव विभोर हो जाती हूँ... नैनों से
अश्रुधारा बहने लगती हैं... मेरी एक पुकार पर बापदादा अपना धाम छोड़कर आ गये... मुझ
आत्मा को अपने आशीर्वादों से भरपूर करने... *बापदादा का रूहानी हाथ मेरे सिर पर
रखकर बाबा बोले चलो "मेरे बच्चे..."* और मैं अपने बापदादा के साथ चलती
हूँ एक ऊँची पहाड़ी पर...
➳ _ ➳ बापदादा मुझ
आत्मा को अपने पास बिठाकर... प्यार भरी... वात्सल्य भरी नजरों से निहार रहे हैं...
और *मैं आत्मा... नजरों से निहाल होती जा रही हूँ... बाबा से आती हुई सर्व शक्तियां
रंग बिरंगी किरणों के रूप में मुझ आत्मा को परिपूर्ण कर रही हैं...* मैं आत्मा...
अपने 63 जन्मों के विकारों से मुक्त होती जा रही हूँ... मेरी सारी
अज्ञानता... दूर होती जा रही है...
➳ _ ➳ बापदादा द्वारा
मिला सच्चा-सच्चा गीता ज्ञान का रहस्य अब मैं आत्मा अपने में धारण कर पाई हूँ...
ज्ञान रत्नों के खजानों से मालामाल हो गई... सम्पत्तिवान बन गई... *लौकिकता को
अलौकिकता में बदल दिया... साधारण आत्मा से मंदिर लायक... पूजनीय बना दिया...*
बापदादा से आती हुई अनंत शक्तियां मुझ आत्मा के अंदर गहराई से समा रही हैं
➳ _ ➳ व्यर्थ के
संकल्पों की जंजीरों से... बन्धनों की रस्सियों से बंधी हुई थी... बापदादा के
आशीर्वचनों से अपने दुःख और अशांति के कारणों को समाप्त कर... *मैं आत्मा...
मास्टर ज्ञानसूर्य बन गई... इस संगम पर मुक्ति जीवनमुक्ति का अनुभव कर लिया...*
सर्व शक्तियों से अपने आप को भरपूर कर... बापदादा से स्नेह भरी विदाई लेकर मैं
आत्मा अपने स्थूल वतन की ओर चल पड़ती हूँ... साथ में सर्व ज्ञान खजाने... मुक्ति
जीवनमुक्ति का अनुभव लेकर अपने इस स्थूल शरीर में प्रवेश करती हूँ...
➳ _ ➳ मेरा स्थूल शरीर
भी बाबा की शक्तियों से भर गया... *मैं आत्मा और मेरा शरीर दोनों अब इस संगमयुग की
क्षणों को यथार्थ रीति जी रहे हैं* और मैं आत्मा सदा गुनगुनाती रहती हूँ...
"तेरा वह प्यार हैं बाबा जो समझाया नहीं जाता... बरस जाता है नैनों से जो
बतलाया नहीं जाता... लगा जादू सा जब तुमने कहा तुम हो मेरे बच्चे" और
शुक्रिया बाबा शुक्रिया मन ही मन बोलती रहती हूँ... ॐ शांति
∫∫ 7 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks-10)
( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )
✺ *"ड्रिल :- अपनी शक्तिशाली वृत्तियों से
वायुमंडल को परिवर्तन कर विश्व परिवर्तक का अनुभव"*
➳ _ ➳ कुछ क्षण के लिए
इस नश्वर संसार के शोरगुल से दूर... स्वयं से ही बातें करती हूँ... कि अगर मुझे
भगवान ना मिले होते... तो आज मेरा जीवन कैसा होता... यही विचार करते करते... आज की
दुनिया की तस्वीर मेरे सामने... स्पष्ट दिखाई देने लगती है... मैं देख रही हूँ कि
आज हर आत्मा... *अंदर से कितनी अशांत और दुःखी है... चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ
है... दुःख का ही वातावरण फैला हुआ है*...
➳ _ ➳ *दुःखों ओर
कष्टों से भरा जीवन जीने के लिए कितने विवश हो चुके हैं... गम के बादलों ने जैसे
सबकी खुशियों के सूरज को ग्रहण लगा दिया है*... इसलिए आज लोग खुल कर हँसना भी भूल
गए हैं... चाहते सभी हैं इस दुःखी जीवन से मुक्त होना... परन्तु क्या, क्यों
और कैसे की उलझन में इतना फंस चुके है... कि निकलने का रास्ता ही नही खोज पा
रहे...
➳ _ ➳ बाबा मुझ आत्मा
को सर्विस के लिए समझानी देते हैं... बच्चे मेरे मीठे बच्चे... विश्व परिवर्तक
बनना है... आपका *ब्राह्मण जन्म इस दुनिया को दुःखों, गमों से छुड़ाने
के लिए हुआ है... अपने जीवन को विश्व कल्याण की सेवा में लगाना है*... अपनी स्थिति
को साकारी से निराकारी बनानी है... जब स्वयं को तपायेंगे तब परिवर्तन होंगे...
बाबा के साथ पूरी सच्चाई और सफाई से रहना है...
➳ _ ➳ बाबा ने मुझ
आत्मा को स्मृति दिलाई... कि मैं विश्व परिवर्तक आत्मा हूँ... अपने सत्य स्वरूप की
स्मृति में जैसे ही मैं आत्मा टिकती हूँ... एक महाज्योति जिनसे *अनन्त प्रकाश की
धाराऐंं... निकल-निकल कर चारों तरफ फ़ैल रही हैं... कितना मनमोहक और लुभावना यह
दृश्य है*... पूरा वायुमण्डल एक अलौकिक दिव्यता से भर गया है...
➳ _ ➳ मैं आत्मा स्वयं
में बाबा से प्राप्त शक्तियों को भर कर... बाबा से आज्ञा ले इस शरीर रूपी रथ में
बैठकर... अनुभव करती हूँ *मुझ आत्मा की वृत्ति पवित्र होती जा रही है... पवित्र
वृत्ति के कारण... वातावरण पवित्र और लाइट होता जा रहा है*... मुझ से अन्य आत्माओं
को भी अच्छी वृत्ति के वायब्रेशन प्राप्त होते अनुभव हो रहे है...
➳ _ ➳ *मैं आत्मा अपनी
वृत्ति से... वाणी से... और कर्म से विश्व-परिवर्तन करती जा रही हूँ*... विश्व
कल्याणकारी बाप का राइट हैंड बन मुझ ब्राह्मण आत्मा को विश्व परिवर्तन के कार्य
में मददगार बनना है... चाहे वायुमंडल कितना खराब है... इस खराब वायुमंडल को अपनी
शुद्ध व शक्तिशाली वृत्तियों से परिवर्तन करना है... मुझ विश्व परिवर्तक आत्मा का
काम है बुरे को अच्छा बनाना... मैं आत्मा विश्व परिवर्तन के निमित्त बन रही हूँ...
यह बहुत ही सुख देने वाला अनुभव है... इससे मुझ आत्मा की खुशी बढ़ती जा रही है...
शुक्रिया बाबा जो आप ने मुझ आत्मा को इस कार्य के लिए चुना शुक्रिया...
∫∫ 8 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( इस रविवार की अव्यक्त मुरली पर
आधारित... )
✺ अव्यक्त
बापदादा :-
➳ _ ➳ और चतुराई
सुनावें? ऐसे समय पर फिर ज्ञान की प्वाइन्ट यूज़ करते हैं कि अभी प्रत्यक्ष फल
तो पा लो भविष्य में देखा जायेगा। लेकिन प्रत्यक्षफल अतीन्द्रिय सुख सदा का है,
अल्पकाल
का नहीं। कितना भी प्रत्यक्षफल खाने का चैलेन्ज करे लेकिन अल्पकाल के नाम से और
खुशी के साथ-साथ बीच में असन्तुष्टता का कांटा फल के साथ जरूर खाते रहेंगे। मन की
प्रसन्नता वा सन्तुष्टता अनुभव नहीं कर सकेंगे। इसलिए ऐसे गिरती कला की कलाबाजी
नहीं करो। बापदादा को ऐसी आत्माओं पर तरस होता है - बनने क्या आये और बन क्या रहें
हैं! *सदा यह लक्ष्य रखो कि जो कर्म कर रहा हूँ यह प्रभु पसन्द कर्म है? बाप
ने आपको पसन्द किया तो बच्चों का काम है - हर कर्म बाप पसन्द, प्रभु
पसन्द करना। जैसे बाप गुण मालायें गले में पहनते हैं वैसे गुण माला पहनों, कंकड़ो
की माला नहीं पहनों। रत्नों की पहनो।*
✺ *"ड्रिल :- हर कर्म प्रभु पसंद करना*”
➳ _ ➳ *मैं आत्मा एकांत
में बैठकर प्यारे बाबा को ख़त लिखती हूँ... फिर मैं आत्मा पंछी बन ख़त लेकर उड़ चलती
हूँ और पहुँच जाती हूँ सूक्ष्म वतन प्यारे-प्यारे बाबा के पास...* एक नन्हा
फरिश्ता बन बाबा की गोद में बैठ जाती हूँ... बाबा से रूह-रिहान करती हूँ... बाबा
मैं आपके लिए ख़त लाई हूँ... प्यारे बाबा मेरे हाथों से ख़त लेकर पढ़ रहे हैं...
➳ _ ➳ ‘प्राण प्यारे
बाबा’, ‘मेरे मीठे बाबा’- आप कितने ही प्यारे हो, मीठे
हो... आपने मुझे नवजीवन दिया है... कौड़ी से हीरे तुल्य बना दिया है... *‘मीठे
बाबा’ आपने अपने दिव्य कलम से कितना ही सुन्दर भाग्य लिखा है मेरा... अगर
मैं सागर को स्याही बनाकर, जंगल को कलम बनाकर भी आपको शुक्रिया
लिखूं तो भी कम है बाबा...* कैसे शुक्रिया करूँ मैं आपकी बाबा... ‘मेरे
बाबा’ आपका दिया जीवन आपको समर्पित... आपकी प्यारी लाडली...
➳ _ ➳ प्यारे बाबा ख़त
पढ़कर प्यार से मेरे सिर पर हाथ रखते हैं और कहते हैं:- ‘मीठे बच्चे’-
मुझे
शुक्रिया कहना है तो सदा हर कर्म बाप पसन्द, प्रभु पसन्द
करो... भक्ति में मुझे पाने के लिए कितना दर-दर भटकते थे... पर अब बाप ने आपको
पसन्द किया, अपना बनाया तो बच्चे सदा प्रभु पसंद बन मेरे
दिल तख्त पर रहो... सदा उडती कला में रहो, कोई भी काम गिरती कला वाली न करो...
*अल्पकाल के नाम, मान, शान का प्रत्यक्षफल न खाओ...
अतीन्द्रिय सुख का अविनाशी प्रत्यक्षफल खाओ...*
➳ _ ➳ मैं आत्मा बाबा की
समझानी सुनते हुए बाबा के प्यार में खो जाती हूँ... बाबा के हाथों से, मस्तक
से दिव्य तेजस्वी किरणें निकलकर मुझ पर पड़ रही हैं... *बाबा से निकलती दिव्य गुण,
शक्तियों
की किरणें मुझ फरिश्ते को दिव्य गुणधारी बना रही हैं...* बाबा सर्व वरदानों से
मुझे भरपूर कर रहे हैं... बाबा मुझे ज्ञान रत्नों की, दिव्य गुणों की
माला पहना रहे हैं...
➳ _ ➳ अब मैं आत्मा
सदा एक ही लक्ष्य रखकर हर कर्म कर रही हूँ... हर कर्म करने के पहले चेक करती हूँ
कि ये प्रभु पसंद है या नहीं... प्रभु पसंद कर्म कर मैं आत्मा बाबा का शुक्रिया कर
रही हूँ... मैं आत्मा सदा बाबा द्वारा दिए दिव्य गुणों और रत्नों की माला पहने रहती
हूँ... कभी भी अवगुणों की कंकड़ो की माला नहीं पहनती हूँ... *प्रभु पसंद कर्म करने
से अब मैं आत्मा सदा प्रसन्नता वा सन्तुष्टता का अनुभव कर रही हूँ...*
⊙_⊙ आप सभी बाबा के
प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की
मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।
♔ ॐ शांति ♔
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