∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 3*5=15)
➢➢ *"यह टाइम बहुत वैल्युएबल है" - यह स्मृति रही ?*
➢➢ *आत्म
- अभिमानी रहने का पुरुषार्थ किया ?*
∫∫ 2 ∫∫ विशेष अभ्यास (Marks:2*10=20)
➢➢ *मालिकपन
की स्मृति से शक्तियों को आर्डर प्रमाण चला स्वराज्य अधिकारी बनकर रहे ?*
➢➢ *त्रिकालदर्शी
स्थिति में स्थित रहकर हर कर्म किया ?*
∫∫ 3 ∫∫ विशेष पुरुषार्थ (Marks: 15)
( इस
रविवार की अव्यक्त मुरली से... )
➢➢ *"सेवाकेंद्र का वायुमंडल शक्तिशाली बनाया ?"*
∫∫ 4 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की
मुरली के सार पर आधारित... )
➢➢ *"मीठे बच्चे - आधाकल्प तुमने जिस्मानी यात्राये की अब रूहानी यात्रा करो,
घर बेठे बाप की याद में रहना, यह है वन्डरफुल
यात्रा"*
❉ *प्यारे बाबा :-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता अपने दुखो में
झुलसाये कुम्हलाये फूल बच्चों को 21 जनमो का अथाह सुख लुटाने
धरा पर उतर आया है... अब शरीर के आवरण से अलग हो, अपने दमकते मणि स्वरूप
के नशे में भर चलो.... और *सच्चे पिता की मीठी महकती यादो में गहरे डूब
चलो*...."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"हाँ मेरे प्यारे बाबा... मै आत्मा आपकी खोज में किस कदर दर दर भटक रही थी...
आपने सहज ही *जीवन में आकर मुझे कितना भाग्यवान बना दिया है.*.. खुशियो से मेरा
दामन सजा दिया है... मै आत्मा हर पल यादो में खोयी गहरे सुख को पा रही
हूँ..."
❉ *मीठे बाबा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... हर साँस संकल्प और समय को
यादो के तारो में पिरोकर... ईश्वरीय खजानो से सम्पन्न होकर सुखो की धरा पर
इठलाओ... सदा यादो में खोये रहो और ईश्वरीय दिल पर झूमते ही रहो... ऐसे सच्चे
प्यार में अपने रोम रोम को भिगो कर *अतीन्द्रिय सुखो की अनुभूतियों में डूब
जाओ*..."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"मेरे प्राणप्रिय बाबा... मैं आत्मा आपको पाकर कितने खुबसूरत भाग्य की मालकिन
हो गयी हूँ... प्यारे बाबा आपने दिल में समाकर मुझे हर दुःख से मुक्त किया है...
*फूलो की छाँव और दिव्य गुणो की महक से जीवन कितना खुबसूरत प्यारा* बना दिया
है..."
❉ *प्यारे बाबा :-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... देह की यात्राओ में मन
तो सदा रिक्त ही रहा... अब रूहानी यात्री बनकर... *मन को सदा की मौज और आनन्द के
अहसासो में भिगो दो.*.. हर पल रूहानी यादो में खोये रहो... ईश्वरीय यादो की खुमारी
में सच्चे सुखो को पाकर... सतयुगी सुखो के अधिकारी बन मुस्कराओ..."
➳ _ ➳ *मैं आत्मा :-*
"हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा ईश्वर पिता को पाने वाली सोभाग्यशाली हूँ...
मीठे बाबा आपने दुखो के दलदल से बाहर निकाल... *मुझे सुखो से भरे फूलो के बगीचे
में बिठा दिया है.*.. ईश्वरीय गोद पाकर मै आत्मा हर दुःख से आजाद होकर, यादो में मुस्करा उठी
हूँ..."
∫∫ 5 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की
मुरली की धारणा पर आधारित... )
✺
*"ड्रिल :- आज की मुरली से बाबा की 4 निमनलिखित
शिक्षाओं की धारणा के लिए विशेष योग अभ्यास*"
❶ *एक सेकण्ड
भी व्यर्थ नही गंवाना*
❷ *आत्म
अभिमानी रहना*
❸ *चलते
फिरते याद में रहना*
❹ *बहुत मीठा
बनना*
➳ _ ➳ परमपिता परमात्मा शिव
बाबा की अवतरण भूमि मधुबन में मैं स्वयं को देख रही हूं। इस पावन धरती पर पहुंचते
ही ऐसा आभास होता है जैसे *ब्रह्मा बाबा आज भी साकार रूप में स्वागत की मुद्रा में
खड़े अपने बच्चों का इंतजार कर रहे हैं*। मन बुद्धि से मैं स्पष्ट देख रही हूँ प्रभु
मिलन का खूबसूरत नजारा। अपने प्यारे परमपिता परमात्मा से मिलने के लिए उनके प्रेम
में बंधी ब्राह्मण आत्मायें दूर - दूर से कैसे उनसे मिलन मनाने पहुंच गई है।
*श्वेत वस्त्र धारण किए, मुख पर दिव्य आभा लिए
सभी ब्राहमण बच्चे ऐसे दिखाई दे रहे हैं जैसे आबू की यह पवित्र धरती फ़रिश्तों से
भर गई है*। प्रभु मिलन की मस्ती में डूबे सभी के चेहरे रूहानियत से चमक रहें हैं।
अपने प्यारे प्रभु से साकार मिलन मनाने की खुशी सभी के मुख मंडल पर स्पष्ट दिखाई
दे रही है।
➳ _ ➳ सभी परमात्म मिलन मनाने
के लिए डायमंड हॉल में एकत्रित हो रहे हैं। *तभी एकाएक सूचना आती है कि प्रभु के
निर्धारित रथ गुलजार दादी जी का स्वास्थ्य ठीक ना होने के कारण आज बाबा नहीं
आएंगे*। मैं देख रही हूं इस खबर को सुनते ही बहुत से ब्राह्मण बच्चे तो संशय
बुद्धि हो व्यर्थ के संकल्पों में उलझ अपनी स्थिति खराब कर रहे हैं। लेकिन वहीं
दूसरी ओर कुछ ब्राह्मण आत्माएं ऐसी भी हैं जिन पर इस खबर का कोई प्रभाव भी नहीं
दिखाई दे रहा। वे साक्षी होकर सब कुछ देख भी रही है और सुन भी रही हैं। किसी भी
तरह का कोई भी भाव उनके चेहरे पर दिखाई नहीं दे रहा। *बिना किसी हलचल के एकरस
स्थिति के आसन पर विराजमान होकर वे अपने प्यारे प्रभु की याद में मगन बैठी है*।
निर्धारित समय पर अव्यक्त बापदादा डायमंड हॉल में उपस्थित होते हैं और साक्षी होकर
अपने हर बच्चे की स्थिति को देखने लगते हैं।
➳ _ ➳ एक बहुत ही खूबसूरत
दृश्य मैं देखती हूं कि *जो बच्चे संशय में आ कर संकल्पो विकल्पों में उलझे हुए
हैं उन्हें अव्यक्त बापदादा की उपस्थिति का आभास ही नहीं हो रहा*। किंतु जो बच्चे
बाबा की याद में एकरस स्थिति में स्थित हैं वे बाबा से बहुत ही सुंदर अव्यक्त मिलन
मना रहे हैं। अव्यक्त *बापदादा अव्यक्त स्थिति में स्थित एक एक बच्चे को स्टेज पर
अपने पास बुला कर उन्हें शक्तिशाली दृष्टि से भरपूर कर रहे हैं*। अपने हाथ से
उन्हें टोली दे रहे हैं। अव्यक्त फरिश्ता बन मैं भी बाप दादा के सामने पहुंच जाती
हूं। बाप दादा अपनी शक्तिशाली दृष्टि से मुझे भरपूर करने लगते हैं। अपने हाथ मैं मेरा
हाथ लेकर मुझे अपनी सर्व शक्तियां विल करने लगते हैं और वरदानों से मेरी झोली भरने
लगते हैं। मन ही मन यह सोच कर मैं ख़ुशी में झूम उठती हूँ कि *स्टेज पर बाबा के
बिलकुल समीप जा कर साकार मिलन का जो सुख मैं लेना चाहती थी उस सुख से बाबा ने आज
मुझे भरपूर कर दिया*।
➳ _ ➳ अव्यक्त मिलन मना कर
अव्यक्त बापदादा जैसे ही विदाई लेते हैं वैसे ही डायमंड हॉल में अव्यक्त बापदादा
के महावाक्य सुनाई देते हैं - "जो बच्चे अव्यक्त स्थिति में स्थित होंगे वो
अव्यक्त रूप में भी ऐसे मिलन मनाएंगे जैसे साकार में मिलन मना रहे हैं"। *इन
महावाक्यों को सुन कर परमात्म मिलन की मस्ती में डूबी हुई मैं बाबा से प्रोमिस
करती हूँ, बाबा - अपनी महा
अव्यक्त स्थिति बनाने का तीव्र पुरुषार्थ मैं आज से ही अवश्य करुँगी*। संगम युग के
इस मोस्ट वैल्युबुल समय को ध्यान में रखते हुए मैं एक भी सेकेण्ड कमाई के बिगर
व्यर्थ नही गवाऊंगी। आत्म अभिमानी बनने का पूरा पूरा पुरुषार्थ अब मैं अवश्य
करुँगी।
➳ _ ➳ अपनी अवस्था जमाने के
लिए हर कर्म आपकी याद में स्थित हो कर करुँगी। चलते फिरते बुद्धि का योग केवल आपके
साथ जोड़ कर रखूंगी। *आप समान बहुत बहुत मीठा बन, मुख से कभी भी किसी के
लिए कोई कड़वे बोल नही बोलूंगी*। मनसा, वाचा, कर्मणा किसी को भी दुःख
नही दूंगी। अपने सम्पूर्णता के लक्ष्य को पाने के लिए हर कदम आपकी श्रीमत पर चलते
हुए निरन्तर आगे बढ़ने का तीव्र पुरुषार्थ मैं अवश्य करती रहूँगी। *मन ही मन बाबा
से इन संकल्पो को पूरा करने की दृढ प्रतिज्ञा कर मैं फिर से अव्यक्त मिलन की मीठी
यादों में खो जाती हूं* और अशरीरी बन याद की यात्रा पर चल पड़ती हूँ।
∫∫ 6 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:-10)
( आज की
मुरली के वरदान पर आधारित... )
✺
*"ड्रिल :- मैं आत्मा स्वराज्य अधिकारी हूँ । "*
➳ _ ➳ " मैं आत्मा हूँ-२, मेरी शक्तियाँ... मन
बुद्धि संस्कार, मैं आत्मा हूँ"...
इस गीत को सुनते हुए मैं आत्मा अपनी आत्मिक स्थिति में स्थित हो गई हूँ... ना कोई
संकल्प, ना कोई विकल्प... मैं
चमकती हुई ज्योति बिन्दु आत्मा भृकुटि के मध्य चमक रही हूँ... मैं आत्मा इस देह की
मालिक हूँ... मन बुद्धि की भी मालिक हूँ... *मन बुद्धि संस्कार मुझ आत्मा की
सूक्ष्म शक्तियाँ हैं... मैं आत्मा इन शक्तियों की मालिक हूँ...*
➳ _ ➳ जन्म-जन्म से
मैं आत्मा अपने पिता परमात्मा को याद करती रही की मुझे शक्ति मिले, जिस शक्ति से विकारों
से मुक्ति मिले... *अब परमात्मा शिव ने प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा इतना सहज राजयोग
सिखलाया जिस द्वारा मैं आत्मा, परमात्मा से शक्ति लेकर
इन विकारों से मुक्त होती जा रही हूँ...* मैं आत्मा स्व के ऊपर राज कर रही हूँ...
जब चाहे किसी भी शक्ति को शिवबाबा की याद से स्वयं में भर सकती हूँ...
➳ _ ➳ मैं आत्मा
मालिकपन की स्मृति से बाप द्वारा मिली हुई सर्व शक्तियों को ऑर्डर प्रमाण कार्य
में लगा रही हूँ... जैसे ही *मैं आत्मा मालिक बन अथॉरिटी स्वरूप में रहकर शक्ति का
आह्वान करती हूँ वह 'जी हाज़िर' हो जाती है...* मैं
आत्मा बहुत शक्तिशाली अनुभव कर रही हूँ... बापदादा हम सब बच्चों को मालिक बना रहे
हैं... और मालिकपन स्मृति का तिलक लगा रहे हैं... वाह क्या स्वरूप है मेरा...
➳ _ ➳ अब मैं आत्मा
मन को जो संकल्प देती हूँ, वैसा ही बुद्धि उसका
चित्र बनाती है... क्या सुंदर नज़ारा है... मैं आत्मा अष्ट शक्तियों की भी मालिक
हूँ... मैं आत्मा मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ... अष्ट भुजाधारी दुर्गा हूँ... *एक-एक
शक्ति मुझ आत्मा का श्रृंगार कर रही है...* पिता परमात्मा शिव की इन शक्तियों से
ही मुझ आत्मा के ढेर मंदिर बने हुए हैं और चारों ओर हमारा गायन हो रहा है
शिवशक्तियाँ आ गई धरती पे... मैं आत्मा शक्ति के साथ साथ नॉलेजफ़ुल भी हूँ...
➳ _ ➳ देखे स्वयं को और फिर
से याद दिलाए की मैं आत्मा शक्ति सम्पन्न स्वराज्य अधिकारी हूँ... बापदादा की राजा
बच्चा/बच्ची हूँ... *बापदादा मुझ आत्मा को स्मृति का तिलक दे रहे हैं... "
मीठे बच्चे, स्वराज्य आपका बर्थ
राइट है "*... यह बर्थ राइट कोई भी आपसे छीन नहीं सकता... यह स्मृति आते ही
मैं आत्मा उमंग उत्साह से भर जाती हूँ और हाँ जी कहकर बाबा को शुक्रिया कहती
हूँ... कि जन्म-जन्म से प्यासी आत्मा की आपने प्यास भुजा दी बाबा... अब मैं आत्मा
स्वराज्य अधिकारी हूँ...
∫∫ 7 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks-10)
( आज की
मुरली के स्लोगन पर आधारित... )
✺
*"ड्रिल :- त्रिकालदर्शी स्थिति
में स्थित रहकर हर कर्म करने से सफलतामूर्त का अनुभव करना"*
➳ _ ➳ मैं आत्मा एकान्त में
बैठी अनुभव कर रही हूँ... यह हवा भी मुझे मेरे प्रभु का संदेशा सुना रही है... *यह
पंछियों की आवाज़... यह झूलते हुए पत्ते सभी प्रभु मिलन के आनन्द में मधुर साज़ बजा
रहे हैं*... और मैं फरिश्ता बाबा की याद में खोया आनन्दनृत्य करता हुआ उड़ता ही जा
रहा हूँ... अब इन चाँद तारों की दुनिया को पार करता हुआ फरिश्तों की दुनिया में
पहुँचता हूँ... वहाँ मैं अपने को बापदादा के सामने पाता हूँ... बापदादा से मीठी
रूहानी दृष्टि लेते हुए ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे सब कुछ पा लिया हो... कुछ भी शेष
नही रहा...
➳ _ ➳ बापदादा अपने वरदानी
हस्त मेरे सिर पर रखते हैं... त्रिकालदर्शी बन कर्म करते हुए सफलता मूर्त बनने का
वरदान देते हैं... बापदादा से इतना सुंदर वरदान प्राप्त कर मैं फरिश्ता आत्मा अपने
कर्मक्षेत्र में आ जाती हूँ... सब स्पष्ट हो गया है... मैं आत्मा इस साकार वतन में
तो मेहमान हूँ... *सृष्टि चक्र का... ड्रामा का स्पष्ट ज्ञान देकर... मेरे बाबा ने
मुझ आत्मा को भी त्रिकालदर्शी बना दिया...*
➳ _ ➳ *साक्षी भाव से
ड्रामा में पार्ट बजाना मुझ आत्मा के लिए कितना सहज हो गया है...* भगवान ही अपना
साथी हो गया... चिन्ता का तो नामोनिशां ही नहीं रहा... कर्मों की गुह्य गति का और
ड्रामा का ज्ञान बुद्धि में याद रख त्रिकालदर्शी बन कर्म करते जा रही हूँ... हर
कर्म करते हुए स्वयं भी संतुष्ट हूँ तथा संपर्क मे आनेवाली हर आत्मा भी संतुष्ट
होती जा रही है...
➳ _ ➳ रोज़ की ज्ञान मुरली
ज्ञान का तीसरा नेत्र खोल रही है... मन व बुद्धि में अमूल्य जानकारी भर... अनमोल
खजानों को भर मैं आत्मा धारणा में ला रही हूँ... *हर कर्म श्रेष्ठ स्मृति में रहकर
करने से सहज ही सफलता प्राप्त हो रही है...* स्मृति स्वरूप बनकर हर कर्म बन्धन को
सेवा के बन्धन में परिवर्तित कर रही हूँ...
➳ _ ➳ मैं विश्व अधिकारी...
सर्वशक्तिवान की सन्तान... सफलता की जन्म सिद्ध अधिकारी आत्मा हूँ... हर परिस्थिति
में सफलता प्राप्त करने की युक्ति तो स्वयं परमात्मा बता रहे हैं... श्रेष्ठ
स्मृतियाँ हर कर्म कुशलता से करने में सहायक हो रही हैं... हर परिस्थिति पर विजय
दिला रही हैं... *स्मृतियाँ समर्थी दिला रही हैं... मैं अशरीरी आत्मा सहज ही सफलता
का सितारा बनता जा रहा हूँ...*
∫∫ 8 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( इस
रविवार की अव्यक्त मुरली पर आधारित... )
✺ अव्यक्त
बापदादा :-
➳ _ ➳ वातावरण
को पावरफुल बनाने का लक्ष्य रखो तो सेवा की वृद्धि के लक्षण दिखाई देंगे:- जैसे
मन्दिर का वातावरण दूर से ही खींचता है, ऐसे याद की
खुशबू का वातावरण ऐसा श्रेष्ठ हो जो आत्माओं को दूर से ही आकर्षित करे कि यह कोई
विशेष स्थान है। *सदा याद की शक्ति द्वारा स्वयं को आगे बढ़ाओ और साथ-साथ वायु
मण्डल को भी शक्तिशाली बनाओ। सेवाकेन्द्र का वातावरण ऐसा हो जो सभी आत्मायें
खिंचती हुई आ जाएं। सेवा सिर्फ वाणी से ही नहीं होती, मंसा
से भी सेवा करो। हरेक समझे मुझे वातावरण पावरफुल बनाना है, हम जिम्मेवार हैं। ऐसा जब लक्ष्य रखेंगें तो सेवा की वृद्धि के लक्षण
दिखाई देंगे।* आना तो सबको है, यह तो पक्का है। लेकिन
कोई सीधे आ जाते हैं, कोई चक्कर लगाकर, भटकने के बाद आ जाते हैं। इसलिए एक-एक समझे कि मैं जागती ज्योति बनकर ऐसा
दीपक बनूँ जो परवाने आपेही आयें। आप जागती ज्योति बनकर बैठेंगे तो परवाने
आपेही आयेंगे।
✺
*"ड्रिल :- सेवाकेंद्र का
वायुमंडल शक्तिशाली बनाना"*
➳ _ ➳ *मैं आत्मा सेवाकेंद्र के हाल के चेयर पर चियरफुल होकर बैठी हूँ...* सभी भाई-बहनें भी
बैठे हुए हैं... अगरबत्ती की भीनी-भीनी खुशबू आ रही है... चारों ओर लाल रोशनी
है... सामने ब्रह्मा बाबा की तस्वीर और शिवबाबा का लाल लाइट चमक रहा है... सभी
मंत्रमुग्ध होकर बाबा के गाने सुनते हुए झूम रहे हैं... सामने दीदी आकर विराजमान
हो जाती हैं... दीदी सबको योग कमेंट्री द्वारा याद की यात्रा पर ले चलती हैं...
➳ _ ➳ मैं आत्मा
भृकुटी के चेयर पर विराजमान हो जाती हूँ... सभी प्यारे बाबा का आह्वान करते हैं...
आह्वान करते ही सामने शिव बाबा के लाल लाइट में फ़्लैश होता है और वो लाइट का फ़्लैश
ब्रह्मा बाबा की तस्वीर में बाबा के मस्तक में चमकने लगता है... *ऐसा लग रहा सामने
तस्वीर से बाबा बाहर निकल साकार रूप में खड़े होकर मुस्कुरा रहे हैं...* और सबको
अपने प्रेम, सुख, शांति की किरणों से
आच्छादित कर रहे हैं...
➳ _ ➳ शांति के सागर को सामने
खड़े देख सभी अपने देहभान से मुक्त हो रहे हैं... शांति के सागर की लहरें चारों ओर
फैल रही हैं... मैं आत्मा शांति के सागर की अनंत गहराईयों में समाती जा रही हूँ...
न कोई आवाज़, न कोई हलचल, न कोई दुःख-अशांति...
मैं आत्मा गहन शांति का अनुभव कर रही हूँ... *सभी के साकार शरीर लुप्त हो चुके
हैं... सभी अपने लाइट के शरीर में चमक रहे हैं... सभी जागती
ज्योति बन चुके हैं...*
➳ _ ➳ सेवाकेंद्र का वायुमंडल
रूहानियत की खुशबू से महक रहा है... सभी जगमगाते हुए दीपक लग रहे हैं... सभी से
वायब्रेशंस निकलकर चारों ओर फैल रहे हैं... सेवाकेंद्र के बाहर दूर-दूर तक रूहानी
खुशबू फैल रही है... सेवाकेंद्र का वातावरण पावरफुल बन
गया है... *सभी रूहानी दीपक बन अपनी रोशनी चारों ओर फैला रहे हैं... और परवानों को
अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं...*
➳ _ ➳ सेवाकेंद्र शांतिकुंड
बन चुका है... शांति की किरणें विश्व की आत्माओं को दूर से ही
आकर्षित कर रही हैं... सभी आत्मायें ऐसा अनुभव कर रही हैं कि यह कोई विशेष स्थान
है... सभी भटकती हुई आत्माएँ महसूस कर रही हैं कि यही उनकी मंजिल है... सभी अशांत, अतृप्त आत्मायें शांति
की शक्ति से खींचे चले आ रहे हैं... *याद की शक्ति द्वारा मैं आत्मा स्वयं भी आगे
बढ़ता हुआ अनुभव कर रही हूँ और साथ-साथ वायु मण्डल को भी शक्तिशाली बना रही हूँ...*
⊙_⊙ आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले
बाबा को आज की मुरली से मिलेचार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।
♔ ॐ
शांति ♔
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