07/05/2017 की मुरली से चार्ट MARKS:- 100

  शिवभगवानुवाच :-
➳ _ ➳  रोज रात को सोने से पहले बापदादा को पोतामेल सच्ची दिल का दे दिया तो धरमराजपुरी में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 
∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 3*5=15) 
➢➢ *"सेवाकेंद्र का वायुमंडल शक्तिशाली बनाया ?"* 
➢➢ *"अपने विष्णु स्वरुप का अनुभव किया ?"* 
➢➢ *"सेवा के विस्तार में सार रूपी बीज की अनुभूति को भूले तो नहीं ?* 
∫∫ 2 ∫∫ विशेष अभ्यास (Marks:2*10=20)


➢➢ *"सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी, सेकण्ड में मूलवतनवासी, सेकण्ड में साकार वतन वासी होने का अनुभव किया ?*

➢➢ *"उड़ता पंछी स्थिति का अनुभव किया ?*


∫∫ 3 ∫∫ विशेष पुरुषार्थ (Marks: 15)

➢➢ *"शरीर से अलग मैं आत्मा हूँ" - ऐसा स्पष्ट अनुभव किया ?*


∫∫ 4 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)
( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

➢➢  *"बीजरूप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ"*

   *प्यारे बाबा :-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... बीजरूप स्थिति में स्थित होकर एवररेड्डी बन मुस्कराओ... सारे बन्धनों के विस्तार की शाखाओ को काटकर सार रूप बनो... बाप की लगन की अग्नि में सबको भस्म करो... *अपने आत्मिक न्यारेपन को हर पल अनुभूतियों में भर चलो.*.."

_   *मैं आत्मा :-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा देह के विस्तार से निकल *आत्मिक स्मर्तियो में खोकर दिव्य गुणो से सजती जा रही हूँ.*.. सारे दुखो के बन्धनों से मुक्त होकर न्यारी प्यारी हो गयी हूँ... बीज रूप के आनन्ददायी अनुभवो से भरती जा रही हूँ..."

   *मीठे बाबा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... ईश्वरीय यादो में गहरे डूब करइस कदर खो जाओ कि अपने साक्षात् स्वरूप को हर पल स्म्रति में जीते ही रहो...ईश्वर पिता के साथ बुद्धियोग जोड़कर... हर लम्हा उनकी यादो में मुस्कराते ही रहो... *सदा ऊँची स्थिति के आसमान में उड़ने वाली बन्धनमुक्त आत्मा बन*... खुशियो के मीठे गीत गाओ..."

_   *मैं आत्मा :-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मैं आत्मा आपकी छत्रछाया में असीम आनन्द की दौलत पाकरतो मालामाल* हो गयी हूँ... प्यारे बाबा... विकारो और प्रकर्ति के हर आकर्षण से मुक्त होकर... मै आत्मा आनन्द के ऊँचे आसमाँ में झूम रही हूँ... और यह ख़ुशी की दौलत हर दिल को बाँट रही हूँ..."

   *प्यारे बाबा :-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... परमात्म छत्रछाया में सदा माया की छाया से सुरक्षित हो चलो... *हर दिल पर ज्ञान के अखूट खजाने लुटाने वालेदौलतमंद बन मुस्कराओ.*.. सच्ची यादो की खुशबु को इस कदर फैलाओ कि... हर आत्मा आकर्षित होकर दिल से खिची...बरबस दौड़ी चली आये..."

_   *मैं आत्मा :-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मैं आत्मा *अपने जैसा चमकदार भाग्य हर आत्मा का बनाने को दिल से आतुर हूँ..*. सदा ईश्वर प्रेम में मगन होकर... माया से सुरक्षित होकरखुशियो भरे नगमे गुनगुना रही हूँ... ज्ञान धन से हर दामन सदा का आबाद कर रही हूँ..."


∫∫ 5 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली की धारणा पर आधारित... )

   *"ड्रिल :- आज की मुरली से बाबा की 4 निमनलिखित शिक्षाओं की धारणा के लिए विशेष योग अभ्यास*"
             *सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी, मूलवतनवासी, साकार वतन वासी बनना*
             *उड़ता पंछी बनना*
             *सेवा के विस्तार में सार रूपी बीज को न भूलना*
             *सेवाकेंद्र का वायुमंडल शक्तिशाली बनाना*

_   आत्मिक स्मृति में स्थित हो कर मैं जैसे ही अपने शिव पिता परमात्मा को याद करती हूँ वैसे ही अशरीरी बन, *ज्ञान और योग के पंख लगा कर मैं आत्मा अपने शरीर रूपी मंदिर से बाहर निकल आती हूँ और चल पड़ती हूँ अपने शिव पिता के पास*। मन बुद्धि के विमान पर सवार हो कर सेकण्ड में मैं पहुँच जाती हूँ सूक्ष्म लोक। अपने सूक्ष्म लाइट के फरिश्ता स्वरूप को धारण कर मैं जैसे ही सूक्ष्म लोक में पहुँचती हूँ *मैं देखती हूँ जैसे फ़रिश्तों की सभा लगी हुई है। लाइट माइट स्वरूप में बापदादा और उनके सामने सभी ब्राह्मण आत्मायें अपने फरिश्ता स्वरूप में विराजमान है*। बापदादा की शक्तिशाली दृष्टि सभी फ़रिश्तों में असीम ऊर्जा का संचार कर रही हैं। सभी रूहानी मौज में डूबे हुए बापदादा के स्नेह में समाए हुए दिखाई दे रहें हैं। बापदादा अपने सभी ब्राह्मण सो फरिश्ता बच्चो को संबोधित करते हुए अब मधुर महावाक्य उच्चारण करते हैं।

_   बाबा कहते मेरे मीठे सिकीलधे बच्चो सदा एवररेडी वही बन सकेंगे *जिन्हें सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी,सेकण्ड में मूलवतनवासीसेकण्ड में साकार वतन वासी होने का अनुभव होगा। इसलिए साकारी दुनिया और साकारी शरीर में होते हुए भी यही अनुभव करो जैसे सूक्ष्म वतन में और मूल वतन में हमेशा बाप के साथ ही रहते हैं*। दफ्तर में काम करने वाला जैसे काम करने के बाद घर चला जाता है ऐसे आप भी कर्म करने के लिए साकार वतन वासी होने का अनुभव करो और फिर जब चाहे सेकण्ड में सूक्ष्म वतन वासीमूल वतन वासी होने की अनुभूति करो। यह अभ्यास ही आपको एवर रेडी बना देगा।

_   इसके साथ साथ उड़ता पंछी स्थिति का भी अनुभव करो। जितना इस स्थिति में स्थित रहेंगे बन्धन मुक्त होने के कारण सदा यही अनुभव करेंगे जैसे मैं सबसे ऊपर हूँ। *जैसे विज्ञान की शक्ति द्वारा ‘स्पेसमें चले जाते हैं तो धरनी का आकर्षण नीचे रह जाता है और वह स्वयं को सबसे ऊपर अनुभव करते और सदा हल्का अनुभव करते हैं*। ऐसे साइलेन्स की शक्ति द्वारा आप भी स्वयं को विकारों की आकर्षणवा प्रकृति की आकर्षण से परे उड़ती हुई स्टेज रूप का अनुभव करेंगे। उड़ने की यह अनुभूति आपको सर्व आकर्षणों से मुक्त कर सदा लाइट रखेगी। ऐसा लगेगा जैसे चलते-फिरते जा रहे हैंउड़ रहे हैंबाप भी बिन्दुमैं भी बिन्दूदोनों साथ-साथ जा रहे हैं।

_   बाबा आगे समझानी देते हुए कहते हैं मेरे मीठे बच्चों अपने साथ साथ सारे विश्व की आत्माओं के भी कल्याण के आप निमित्त हो। किंतु सेवा करते सदा इस बात का ध्यान रखना क़ि सेवा के विस्तार में सार रूपी बीज को ना भूल जाना। *सेवा में स्वयं को इतना बिजी मत कर लेना कि घर ही भूल जाये। सेवा में भी अगर यह स्मृति रखेंगे कि बाप के साथ जाना है तो सेवा में सदा अचल स्थिति का अनुभव करेंगे*। इसलिए विस्तार में आते स्वयं भी सार स्वरूप में स्थित रहना और औरों को भी सार स्वरूप की अनुभूति कराना तो सेवा में सहज ही सफलता प्राप्त होगी।

_   सेवाकेंद्र का वायुमंडल शक्तिशाली बने इसका भी विशेष ध्यान रखना। क्योकि वातावरण को पावरफुल बनाने का लक्ष्य रखेंगे तो सेवा की वृद्धि के लक्षण स्वत: दिखाई देंगे। *जैसे मन्दिर का वातावरण दूर से ही खींचता हैऐसे याद की खुशबू का वातावरण ऐसा श्रेष्ठ हो जो आत्माओं को दूर से ही आकर्षित करे कि यह कोई विशेष स्थान है*। सेवाकेन्द्र का वातावरण ऐसा हो जो सभी आत्मायें खिंचती हुई आ जाएं। सेवा सिर्फ वाणी से ही नहीं होतीमंसा से भी सेवा करो। हरेक समझे मुझे वातावरण पावरफुल बनाना हैहम जिम्मेवार हैं। ऐसा जब लक्ष्य रखेंगे तो सेवा की वृद्धि के लक्षण दिखाई देंगे।

_   सारी समझानी देने के बाद बाबा सभी फ़रिश्तों को विजय का तिलक लगाते हुए और वरदानों से भरपूर करते हुए फरमान करते है कि जाओ मेरे विश्व कल्याणकारी बच्चो अब एवररेडी और उड़ता पंछी बन *सदा लाइट माइट स्वरूप में स्थित हो कर सर्व आत्माओं को भी बन्धनमुक्त बना कर सारे विश्व की आत्माओ का कल्याण करो*। सभी फरिश्ते अब बाबा के फरमान का पालन करने के लिए साकारी दुनिया में लौट आते हैं।


∫∫ 6 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:-10)
( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

   *"ड्रिल :- "मै आत्मा सर्व प्राप्ति सम्पन्न हूँ।*

 _   मै आत्मा मस्तक सिंहासन पर विराजमान... *एक चमकती हुई दिव्य ज्योति हूँ... मानसरोवर के किनारे बापदादा की यादों में खोई हुई...* बापदादा का आह्वान कर रही हूँ... "मेरे प्यारे बाबा आ जाओ... अपना धाम छोड़कर मेरे पास आ जाओ... अब देर न करो... बहुत इंतजार किया है... अब न करवाओ"

 _   मुझ आत्मा की यह प्यार भरी पुकार सुनकर... *बापदादा कंबाइंड स्वरुप में मेरे सामने खड़े हो गए... मैं ख़ुशी के इन पलों को अश्रुभीनी आँखों से बापदादा के अलौकिक रूप को निहार रही हूँ...* बापदादा से आती हुई प्यार भरी सर्व शक्तिरूपी किरणों से मैं आत्मा अपने आप को सम्पन्न कर रही हूँ... 63 जन्मो के विकारों से मैं आत्मा स्वयं को मुक्त कर रही हूँ...

 _   बापदादा ने अपना वरदानी हाथ मेरे सर पर रख कर मुझे एक अलौकिक सफर पर... मन की यात्रा... पर ले चलते हैं... मैं आत्मा अपने असली स्वरुप को देख रही हूँ... चमकती हुई दिव्य ज्योति मैं आत्मा... अपने घर परमधाम में हूँ जहाँ असीम शांति ही शांति है... *मैं संपूर्ण पवित्र हूँ... अपने परमपिता शिवबाबा की सर्वशक्तियों की अधिकारी अपने आप को महसूस कर रही हूँ...* परमात्मा प्यार की अधिकारी... अपने देवी स्वरुप को देख रही हूँ... 16 कला संपूर्ण... संपूर्ण निर्विकारी मैं आत्मा ...

 _   दिव्य अलौकिक देह में विराजमान हूँ... सतयुग में अपने आप को सोने के महलों में देख रही हूँ... *स्वराज्य अधिकारी मैं आत्मा अपने पहले जन्म में सुखों के झूलों में झूल रही हूँ...* पूज्य स्वरुप में स्वयं को मै मंदिर में देख रही हूँ... सामने हजारो भक्त खड़े हैं... विभिन्न कामनाओं से युक्त... मुझ आत्मा से सकाश निकल कर सब की मनोकामनाएं पूर्ण हो रही है...

 _   बाबा की अलौकिक पालना में झूलती हुई मैं आत्मा देखती हूँ अपने संगमरूपी ब्राह्मण स्वरुप को... *कभी सोचा नहीं था कि भगवान मेरा हो जाएगा...* ज्ञान रत्नों से मेरी झोली भरने वाले मेरे बाबा को मैं आत्मा मन ही मन शुक्रिया कर रही हूँ... *संगम युग में बाबा मिल गए... 21 जन्मों की बादशाही मिल गई*... स्वराज्य अधिकारी बना दिया... बेहद के दाता ने सर्व खजानों की प्राप्तियों से सम्पन्न कर दिया...

 _   मैं आत्मा अपने फ़रिश्ते स्वरुप को देख रही हूँ... प्रकाश के चमकीले स्वरुप में... मैं आत्मा विराजमान हूँ... संपूर्ण मुक्त... परम पवित्र... अनासक्त मैं अपने आप को महसूस कर रही हूँ... फ़रिश्ता स्वरुप में कमल आसन पर विराजमान... सर्व शक्तियों से बाबा मूझे भरपूर कर रहे हैं... *चारो स्वरूपों का  स्वदर्शन करवा कर बाबा ने मुझे अलौकिक ख़ुशी की अधिकारी बना दिया...*

 _   जन्म-जन्म के विकारों से मुक्त कर दिया... बापदादा के कंबाइंड स्वरुप को अपने साथ हर पल महसूस करती मैं आत्मा गुनगुनाती हूँ  *"पाना था जो पा लिया अब और क्या बाकी रहा... प्रभु मिलन की मस्तियों में झूमता मन गा रहा"...* बापदादा को धन्यवाद कहती मैं आत्मा अपने साकारी  स्थूल शरीर में ब्राह्मण जीवन की अलौकिक ख़ुशी में झूल रही हूँ... ॐ शांति...

∫∫ 7 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks-10)
( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

   *"ड्रिल :- साधना को साधनों पर आधारित न कर, निर्विघ्न स्थिति का अनुभव"*

_  अपने आश्रम के बाबा रूम में बैठ कर... *मैं ब्राह्मण आत्मा अव्यक्त बापदादा की आज्ञानुसार... स्वयं को अशरीरी स्थिति में स्थित करने का... अभ्यास कर रही हूँ*... सेकंड में देह से न्यारी हो कर... मैं आत्मा मन बुद्धि रूपी विमान पर बैठ कर पहुँच जाती हूँ... अपने परमपिता परमात्मा शिव बाबा के पास परमधाम...

_   बीजरूप बाप की मास्टर बीजरूप सन्तान... मैं स्वयं को देख रही हूँ... पाँच तत्वों की दुनिया से पार निराकारी दुनिया में... बिंदु बाप और उनके सामने मैं बिंदु आत्मा... कितना सुखद दृश्य है... *आत्मा और परमात्मा का यह मंगल मिलन... चित को चैन और मन को आराम दे रहा है*... बीजरूप बाबा से आती सर्वशक्तियोंं रूपी किरणों की बौछारें... मुझे असीम बल प्रदान कर रही है...
  
_   शक्ति स्वरूप स्थिति में स्थित हो कर... मैं पुनः लौट आती हूँ अपने आश्रम के बाबा रूम में... और अपने साकारी ब्राह्मण तन में प्रवेश कर... भृकुटि पर विराजमान हो कर... *मैं बाबा का आह्वान करती हूँ... मेरा आह्वान सुनकर बाबा... सूक्ष्म वतन में अपने आकारी तन का आधार लेकर... मेरे सामने उपस्थित हो जातें हैं*.. मैं बाबा से कहती हूँ... बाबा अब मैं आत्मा... बेहद की वैराग्य वृत्ति की भट्ठी में तपना चाहती हूँ...

_  बापदादा मेरे सामने संदली पर बैठे बड़े प्यार से महावाक्य उच्चारण करते है... मेरे मीठे सिकीलधे बच्चे... बाप भी तो यही चाहते है... कि *अभी वर्तमान समय बाप को... स्वयं को प्रत्यक्ष करने की भावना से... अभी साधनों के बजाए... बेहद की वैराग्य वृति हो*... साधनों के होते हुए भी बेहद का वैराग्य...

_   *बाबा के महावाक्य मुझ आत्मा में... गहराई से धारण हो रहें है*... मैं आत्मा स्वयं को वैराग्य वृति की तरफ विशेष अटेंशन दिला रही हूँ... विश्व की आत्माओं के कल्याण के प्रति... इस समय विधि की आवयश्कता है... जो बाबा ने विधि बताई उस विधि द्वारा... *मैं आत्मा साधना का वायुमंडल चारों ओर फैलाती जा रही हूँ*... सच्ची तपस्या व साधना द्वारा ही... आत्माओं को सुख... शांति का अनुभव कराती जा रही हूँ...

_   मैं आत्मा साधनों के प्रयोग से दूर होती जा रही हूँ... साधना में रह अपनी आत्मा को शुद्ध पवित्र बना रही हूँ... *साधनों वश जो साधना में विघ्न थे... जैसे अलबेलापन... आलस्य वह अब समाप्त हो रहें है*... मैं आत्मा स्वयं को साधना में मग्न रहने वाली अनुभव कर रही हूँ... शुक्रिया मेरे बाबा शुक्रिया...


∫∫ 8 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)
( इस रविवार की अव्यक्त मुरली पर आधारित... )

 अव्यक्त बापदादा :- 

 _   दूसरी निशानी वा अनुभूति- जैसे भक्तों को वा आत्मज्ञानियों का व कोई-कोई परमात्म-ज्ञानियों को दिव्य दृष्टि द्वारा ज्योति बिन्दु आत्मा का साक्षात्कार होता हैतो साक्षात्कार अल्पकाल की चीज है,साक्षात्कार कोई अपने अभ्यास का फल नहीं है। यह तो ड्रामा में पार्ट वा वरदान है।  *लेकिन एवररेडी अर्थात् साथ चलने के लिए समान बनी हुई आत्मा साक्षात्कार द्वारा आत्मा को नहीं देखेंगी लेकिन बुद्धियोग द्वारा सदा स्वयं को साक्षात् ‘ज्योति बिन्दु आत्माअनुभव करेगी। साक्षात् स्वरूप बनना सदाकाल है और साक्षात्कार अल्पकाल का है। साक्षात स्वरूप आत्मा कभी भी यह नहीं कह सकती कि मैंने आत्मा का साक्षात्कार नहीं किया है। मैंने देखा नहीं है। लेकिन वह अनुभव द्वारा साक्षात् रूप की स्थिति में स्थित रहेंगी।* जहाँ साक्षात स्वरूप होगा वहाँ साक्षात्कार की आवश्यकता नहीं। ऐसे साक्षात आत्मा स्वरूप की अनुभूति करने वाले अथार्टी सेनिश्चय से कहेंगे कि मैंने आत्मा को देखा तो क्या लेकिन अनुभव किया है। क्योंकि देखने के बाद भी अनुभव नहीं किया तो फिर देखना कोई काम का नहीं। तो ऐसे साक्षात् आत्म-अनुभवी चलते-फिरते अपने ज्योति स्वरूप का अनुभव करते रहेंगे।

   *"ड्रिल :-  बुद्धियोग द्वारा सदा स्वयं को साक्षात् 'ज्योति बिन्दु आत्माअनुभव करना*

 _   *मैं आत्मा मधुबन की मधुर स्मृतियों को स्मृति में रख पहुँच जाती हूँ शांति स्तम्भ...* जहाँ प्यारे बापदादा बाहें पसारे खड़े मुस्कुरा रहे हैं... मैं आत्मा बाबा की बाँहों में सिमट जाती हूँ... और बाबा को कहती हूँ बाबा- अब घर ले चलो... इस आवाज़ की दुनिया से पार ले चलो... बापदादा बोले:- बच्चे- मैं अपने साथ ले जाने के लिए ही आया हूँ... साथ जाने के लिए एवररेडी बनो... बिंदु रूप में स्थित हो जाओ...

 _   बापदादा मेरे सामने कई जन्मों के हिसाब-किताब के विस्तार रूपी वृक्ष को इमर्ज करते हैं... *मुझ आत्मा के देह के स्मृति की शाखाएंदेह के संबंधो की शाखाएंदेह के पदार्थो की शाखाएंभक्ति मार्ग की शाखाएंविकर्मों के बंधनों की शाखाएंकर्मभोगों की शाखाएं ऐसे भिन्न-भिन्न प्रकार के हिसाब-किताब का बहुत बड़ा वृक्ष मेरे सामने खड़ा है...* कई जन्मों से मुझ आत्मा ने इस वृक्ष को आत्म विस्मृति के कारण बड़ा कर दिया... देहभान के पानी सेदेह अभिमान के खाद से इस वृक्ष की कई शाखाएं निकाल आईं हैं...

 _   मैं आत्मा बाबा को निहारते हुए बाबा की याद में खो जाती हूँ... बाबा के दोनों हाथों सेमस्तक से दिव्य तेजस्वी किरणें निकलकर मुझ पर पड़ रही हैं... *बाबा की याद की लगन की अग्नि प्रज्वलित हो रही है... इस अग्नि में सारा वृक्ष जलकर भस्म हो रहा है...* सारी शाखाएं टूटकर भस्म हो रही हैं... देह केदेह के संबंधो केदेह के पदार्थो के,सर्व प्रकार के विस्तार का वृक्ष भस्म हो रहा है... कई जन्मों के विकर्म दग्ध हो रहे हैं... मैं आत्मा सभी प्रकार के कर्मभोगों से मुक्त हो रही हूँ...

 _   पूरा वृक्ष जलकर भस्म हो गया अब सिर्फ बची मैं बीजरूप आत्मा जो इस विस्तार रूपी वृक्ष के नीचे दबी पड़ी थी... मैं बीज स्वरुपबिंदु रूप आत्मा हीरे समान चमक रही हूँ... कितना ही हल्का महसूस कर रही हूँ... *मैं दिव्य सितारादिव्य ज्योतिदिव्य मणिदिव्य प्रकाश का पुंज हूँ...* मुझ आत्मा का वास्तविक स्वरुप कितना ही सुन्दर है...

 _   मैं बिंदु आत्मा बिंदु बाप के साथ उड़ चली अपने मूलवतन... अपने असली घर मेंअपने असली स्वरुप में,अपने असली पिता के सामने मैं आत्मा दिव्यअलौकिक अनुभूतियाँ कर रही हूँ... मैं आत्मा अपने निज गुणों को धारण कर अपने निज स्वरुप की साक्षात अनुभूति कर रही हूँ... साक्षात् आत्मा स्वरूप की स्थिति में स्थित हो रही हूँ... *मैं आत्मा अपने स्वरुप का साक्षात्कार भी कर रही हूँ और साक्षात् आत्म-अनुभवी बन चलते-फिरते अपने ज्योति बिंदु स्वरूप का अनुभव भी कर रही हूँ...*


_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिलेचार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

♔ ॐ शांति 

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